Mahakal Ka Roop Nirala
महाकाल का रूप निराला,
आज मुझे बस देखण दे,
देखण दे देखण दे,
महाकाल को जी भर देखण दे…..
मस्तक पर चंदा है उनके हाँथ में डमरू बाजे,
गले नाग है नीलकंठ के कानों में कुण्डल साजे,
आज मुझे बस देखण दे….
दर्शन करलु महाकाल का भाग्य मेरे खुल जाए,
दूध चढ़ाऊ शिव पिण्डी पे पाप सभी धूल जाए,
आज मुझे बस देखण दे….
मेरे दिल के बीच बसे है महाकाल महाराजा,
आजा प्यारे तुझे बुलाऊ तू भी उज्जैन आजा,
आज मुझे बस देखण दे….
महाकाल के नाम का प्रेमी सारा जग दीवाना,
लगन लगी है महाकाल से कहता सारा जमाना,
आज मुझे बस देखण दे….

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile