महाकाल का रूप निराला

Mahakal Ka Roop Nirala

महाकाल का रूप निराला,
आज मुझे बस देखण दे,
देखण दे देखण दे,
महाकाल को जी भर देखण दे…..

मस्तक पर चंदा है उनके हाँथ में डमरू बाजे,
गले नाग है नीलकंठ के कानों में कुण्डल साजे,
आज मुझे बस देखण दे….

दर्शन करलु महाकाल का भाग्य मेरे खुल जाए,
दूध चढ़ाऊ शिव पिण्डी पे पाप सभी धूल जाए,
आज मुझे बस देखण दे….

मेरे दिल के बीच बसे है महाकाल महाराजा,
आजा प्यारे तुझे बुलाऊ तू भी उज्जैन आजा,
आज मुझे बस देखण दे….

महाकाल के नाम का प्रेमी सारा जग दीवाना,
लगन लगी है महाकाल से कहता सारा जमाना,
आज मुझे बस देखण दे….

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