महाकाल दीवानों का वासी है तू शमशानो का

महाकाल की भक्ति में डूबे हुए भक्त जानते हैं कि वे सिर्फ मंदिरों में ही नहीं, बल्कि श्मशानों में भी वास करते हैं। महाकाल दीवानों का, वासी है तू श्मशानों का भजन महादेव के उस रूप को दर्शाता है, जो हर बंधन से मुक्त है, जो हर जगह विद्यमान हैं। यह भजन हमें उनकी असीम शक्ति, वैराग्य और भयंकर सौम्यता का अनुभव कराता है, जो संसार के मोह-माया से परे है।

Mahakal Deewanon Ka Vasi Hai Tu Shamshano Ka

महाकाल सरकार भोले,
काशी विश्वनाथ भोले,
वासी है तू शमशानो का,
महाकाल दीवानों का,
महाकाल मस्तानों का।1।

नटराजन के रूप में,
महादेव करते तांडव भारी,
काल के भी काल,
बने महाकाल भोले शिव त्रिपुरारी,
देव है तू वरदानों का,
महाकाल दीवानो का,
महाकाल मस्तानों का।2।

रूप अलबेला अघोरी सा,
है तन पर मृग की छाला,
मन को भाती है मेरे शंभू,
तेरी रुद्राक्ष की माला,
राजा तू जग के खजानों का,
महाकाल दीवानो का,
महाकाल मस्तानों का।3।

हे नमो हर हर जटा शंकर,
मसानो में रहने वाले,
शिव हे गंगाधर प्रलय बनकर,
दुखों को हरने वाले,
मोड़े तू रुख तूफानों का,
महाकाल दीवानो का,
महाकाल मस्तानों का।4।

देखो सभी हारे मगर,
काशी के वो नंदी नहीं हारे,
देते रहे हर पल गवाही वो,
यही हैं शिव जी हमारे,
काशी हुआ है दीवानों का,
महाकाल दीवानो का,
महाकाल मस्तानों का।5।

महाकाल सरकार भोले,
काशी विश्वनाथ भोले,
वासी है तू शमशानो का,
महाकाल दीवानों का,
महाकाल मस्तानों का।6।

महाकाल उन भक्तों को अपनाते हैं जो सच्चे मन से उन्हें पुकारते हैं, क्योंकि वे सिर्फ मंदिरों के नहीं, बल्कि पूरे ब्रह्मांड के अधिपति हैं। “महाकाल दीवानों का, वासी है तू श्मशानों का” भजन की तरह “चिता भस्म से रोज इनका होता रूप श्रृंगार”, “भोलेनाथ ने पकड़ा हाथ नहीं तो मैं बह जाता”, “शंकर भोले भंडारी तुम जन जन के हितकारी”, और “सच्चे मन से भोले को जिसने है ध्याया” जैसे भजन भी हमें शिव के भयंकर और सौम्य दोनों स्वरूपों की अनुभूति कराते हैं। आइए, इन भजनों का पाठ करें और शिव की असीम शक्ति में डूब जाएं। ????????

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