Le Chal Ri Gaura
वृंदावन जाने की,
मेरे मन में आई है,
चल ले चल री गौरा,
वहां दुनिया जा रही है,
चल ले चल री गौरा,
वहां दुनिया जा रही है…….
वहां नर नहीं जाते हैं,
वहां नारी जाती हैं,
मेरी नारी बनने की,
मेरे मन में आई है,
चल ले चल री गौरा,
वहां दुनिया जा रही है……
वहां डमरु नहीं बजता,
वहां मुरली बजती है,
मेरे मुरली सुनने की,
बड़ी मन में आ रही है,
चल ले चल री गौरा,
वहां दुनिया जा रही है……..
वहां भांग नहीं मिलती,
माखन मिलता है,
मेरे माखन खाने की,
बड़ी मन में आ रही है,
चल ले चल री गौरा,
वहां दुनिया जा रही है…….
वहां तांडव नहीं होता,
वहां रास होता है,
मेरे रास देखने की,
बड़ी मन में आ रही है,
चल ले चल री गौरा,
वहां दुनिया जा रही है……
वृंदावन जाने की,
मेरे मन में आई है,
चल ले चल री गौरा,
वहां दुनिया जा रही है,
चल ले चल री गौरा,
वहां दुनिया जा रही है…..

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile