Kalo Ke Kaal Shiv Mahakal
कालो के काल शिव महाकाल,
उसे कौन छुए शिव जिसकी ढाल,
गंगा है जटा में सर्प भाल,
तन पे भभूत गल सर्प माल,
शिव में समायी सारी सृष्टि,
सृष्टि में शिव है समाया,
ॐ नमः शिवाया, शिवाया, नमः शिवाया…..
पीके भंग भोले मलंग जब जोगनियो के संग डोले,
भूत प्रेत औघड़ झूमे, महाकाल जटाये जब खोले,
नरम तराज़ू शिव का डमरू, पाप पुण्य सबके तोले,
अगड़ बम ब बम बगड़ बम ब बम, शिव में रविश धड़कन बोले,
ॐ नमः शिवाया, शिवाया, नमः शिवाया…..

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile