कैसे मैं शुक्र करूँ मेरे भोले भंडारी भजन लिरिक्स

कैसे मैं शुक्र करूँ मेरे भोले भंडारी भजन में भक्त अपने दिल की गहराइयों से शिव जी की महिमा का गुणगान कर रहे हैं। यह भजन इस बात को दर्शाता है कि शिव के चरणों में समर्पण और भक्ति ही एकमात्र रास्ता है, जिससे जीवन में सच्ची शांति और सुख प्राप्त किया जा सकता है। पंडित सत्य प्रकाश जी द्वारा प्रस्तुत इस भजन में भक्त के मन में जो श्रद्धा और प्रेम है, वह शिव की अनगिनत कृपाओं का आदान-प्रदान करने का प्रयास कर रहा है। यह भजन भक्तों को शिव के प्रति अपने भावनाओं और आस्थाओं को व्यक्त करने का सुंदर तरीका प्रदान करता है।

Kaise Main Karu Mere Bhole Bhandari

गुणगान सुबह शाम करूँ,
मैं ध्यान धरूँ तेरा,।
तू मेरा है मैं तेरा हूँ,
और कुछ भी नहीं मेरा,
किमस्त संवर गई मेरी,।
तूने ऐसी नज़र डाली,
कैसे मैं शुक्र करूँ,
मेरे भोले भंडारी।।

और मांगू नहीं कुछ भी,
बस मांगू तेरी भक्ति।
चरणों से लगाकर रखना,
बस करूँ यही विनती,
मुझे अपना बना लो ऐसे।
चरणों का फूल हूँ जैसे,
सदा साथ तुम्हारे रखना,
नंदी रहते है जैसे।
भक्ति में उम्र गुजारूंगा,
जैसे नंदी ने गुजारी,
कैसे मैं शुक्र करूं,
मेरे भोले भंडारी।।

मेरी आँखों ने देखे,
बाबा जो भी सपने।
मेरे सोचने से पहले ही,
वो तुमने पुरे किये,
पाया ना खुद को अकेला।
संग मेरे भक्तो का मेला,
हर कष्ट मिटा देता है,
बाबा महाकाल शिव भोला।
कुछ और कहा नहीं जाए,
जाऊं तुझपे मैं बलिहारी,
कैसे मैं शुक्र करूं,
मेरे भोले भंडारी।।

गुणगान सुबह शाम करूँ,
मैं ध्यान धरूँ तेरा।
तू मेरा है मैं तेरा हूँ,
और कुछ भी नहीं मेरा,
किमस्त संवर गई मेरी।
तूने ऐसी नज़र डाली,
कैसे मैं शुक्र करूँ,
मेरे भोले भंडारी।।


कैसे मैं शुक्र करूँ मेरे भोले भंडारी भजन में शिव के प्रति श्रद्धा और भक्ति की गहरी भावना को व्यक्त किया गया है। उनकी कृपा से ही जीवन में सच्ची सुख-शांति और समृद्धि का अनुभव होता है। शिव की महिमा को गाने और उनके भजनों का अनुभव करने से हमारे जीवन में दिव्यता का प्रवेश होता है। इस भजन के साथ-साथ, आप शिव शंकर डमरू धारी है जग के आधार, महाकाल को मनाएंगे भोलेनाथ को मनाएंगे, और भोले शंकर की शान निराली जैसे भजनों को भी अपने दिनचर्या का हिस्सा बना सकते हैं, जो शिव के दिव्य गुणों और कृपाओं का आभास दिलाते हैं।

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