शिव जी की तपस्या और वैराग्य का स्वरूप हमें सिखाता है कि सच्चा आनंद भौतिक वस्तुओं में नहीं, बल्कि आत्मिक शांति में है। जोगी पर्वत पे बैठा बैठा ध्यान धरे भजन हमें भोलेनाथ के उसी ध्यानमग्न स्वरूप की अनुभूति कराता है, जहां वे कैलाश पर्वत पर समाधि लगाए समस्त सृष्टि के कल्याण का चिंतन कर रहे हैं। जब हम इस भजन का पाठ करते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो हम स्वयं उस दिव्य वातावरण में उपस्थित होकर उनकी आराधना कर रहे हों।
Jogi Parvat Pe Baitha Baitha Dhyan Dhare
जोगी पर्वत पे बैठा बैठा,
ध्यान धरे,
रखता सबकी खबर,
कल्याण करे,
जोगी पर्वत पे बेठा बेठा,
ध्यान धरे।1।
जाने उसको लगी है जी,
किसकी लगन,
बैठा कैलाश पर,
करता किसका भजन,
आंख मूंद के वो तो,
राम राम करे,
जोगी पर्वत पे बेठा बेठा,
ध्यान धरे।2।
देवों का देव,
अंतर्यामी है वो,
सबकी झोली है भरता,
भोले दानी है वो,
जिसका सारा जगत,
गुणगान करे,
जोगी पर्वत पे बेठा बेठा,
ध्यान धरे।3।
मेरी गौरा मैया का,
श्रृंगार है वो,
‘उर्मिल’ सृष्टि का,
पालनहार है वो,
जिसकी महिमा का,
वेद बखान करे,
जोगी पर्वत पे बेठा बेठा,
ध्यान धरे।4।
जोगी पर्वत पे बैठा बैठा,
ध्यान धरे,
रखता सबकी खबर,
कल्याण करे,
जोगी पर्वत पे बेठा बेठा,
ध्यान धरे।5।
भगवान शिव योग, ध्यान और भक्ति के प्रतीक हैं, और जो उनकी आराधना करता है, उसे अपार ज्ञान और शांति प्राप्त होती है। “जोगी पर्वत पे बैठा बैठा ध्यान धरे” भजन की तरह “चिता भस्म से रोज इनका होता रूप श्रृंगार”, “भोलेनाथ ने पकड़ा हाथ नहीं तो मैं बह जाता”, “शंकर हैं मतवाले” और “महाकाल जपते जपते दौड़ा चला मैं आऊं” जैसे भजन भी हमें शिवजी के विभिन्न स्वरूपों और उनकी भक्ति की गहराइयों तक पहुंचाते हैं। आइए, इन पावन भजनों का पाठ करें और शिवमय हो जाएं। ????????

मैं आचार्य ब्रह्मदत्त, सनातन धर्म का एक साधक और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचारक हूँ। मेरा जीवन देवी-देवताओं की आराधना, वेदों-पुराणों के अध्ययन और भक्ति मार्ग के अनुसरण में समर्पित है। सूर्य देव, खाटू श्याम, शिव जी और अन्य देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान करना मेरे लिए केवल एक लेखन कार्य नहीं, बल्कि एक दिव्य सेवा है। मैं अपने लेखों के माध्यम से भक्तों को पूजन विधि, मंत्र, स्तोत्र, आरती और धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान सरल भाषा में प्रदान करने का प्रयास करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने आध्यात्मिक पथ को सुगम और सार्थक बना सके। View Profile