Jitane Taare Ambar Me
जितने तारे अंबर में मेरी चुनरी में जड़वा दे ओ,
मेरे भोले भंडारी मेरी लहंगा चुनरी लाई दे ओ॥
रोटी बनाओ शर्म लागे मेरे घर होटल खुल वायदे ओ,
मेरे भोले भंडारी मेरी लहंगा चुनरी लाई दे ओ॥
पानी खीचू शर्म लागे मोहे, घर सिमरी लगवाए दे ओ,
मेरे भोले भंडारी मेरी लहंगा चुनरी लाई दे ओ॥
कपड़े धो शर्म लगे मोहे, मेरे घर धोबी भी लगवा दे ओ,
मेरे भोले भंडारी मेरी लहंगा चुनरी लाई दे ओ॥
गोबर उठा हूं शर्म लगे, मेरे घर भंगी लगवाए दे,
मेरे भोले भंडारी मेरी लहंगा चुनरी लाई दे ओ॥

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile