जय हो भोलेनाथ मैं वारि जाऊं कैलाशी भजन लिरिक्स

आज हम लेकर आए हैं भक्ति से सराबोर भजन जय हो भोलेनाथ मैं वारि जाऊं कैलाशी जिसमें भक्त अपने आराध्य शिवजी के चरणों में खुद को समर्पित करने की भावना प्रकट करता है। यह भजन भगवान शिव की महिमा, उनकी कैलाश पर स्थित दिव्यता और उनकी कृपा की अनंतता का वर्णन करता है।

Jai Ho Bholenath Main Wari Jaun Kailashi Bhajan Lyrics

जय हो भोलेनाथ,
मैं वारि जाऊं कैलाशी।

माथे पे तेरे चंदा साजे,
हाथ में डमरू डम डम बाजे,
जय हों भोलेनाथ,
मैं वारि जाऊं कैलाशी,
मैं वारि जाऊं कैलाशी,
बलिहारी जाऊं कैलाशी,
जय हों भोलेनाथ,
मैं वारि जाऊं कैलाशी।।

बाएं अंग तेरे गिरिजा सोहे,
दाएं गजानन मन को मोहे,
नंदी के तुम असवार,
मैं वारि जाऊं कैलाशी,
जय हों भोलेनाथ,
मैं वारि जाऊं कैलाशी।।

जटा में तेरे गंगा साजे,
भुत प्रेत तेरे आगे नाचे,
हो रही जय जयकार,
मैं वारि जाऊं कैलाशी,
जय हों भोलेनाथ,
मैं वारि जाऊं कैलाशी।।

भांग धतूरे का भोग लगाए,
डम डम डम डम डमरू बजाए,
भक्तो के पालनहार,
मैं वारि जाऊं कैलाशी,
जय हों भोलेनाथ,
मैं वारि जाऊं कैलाशी।।

ये सारा जग संसार है तेरा,
कैलाश पर्वत के ऊपर बसेरा,
महिमा है अपरम्पार,
मैं वारि जाऊं कैलाशी,
जय हों भोलेनाथ,
मैं वारि जाऊं कैलाशी।।

माथे पे तेरे चंदा साजे,
हाथ में डमरू डम डम बाजे,
जय हों भोलेनाथ,
मैं वारि जाऊं कैलाशी,
मैं वारि जाऊं कैलाशी,
बलिहारी जाऊं कैलाशी,
जय हो भोलेनाथ,
मैं वारि जाऊं कैलाशी।।

“जय हो भोलेनाथ मैं वारि जाऊं कैलाशी” भजन भोलेनाथ की उस दिव्यता को छूता है जहाँ भक्त अपना सर्वस्व अर्पित कर देता है। यह भजन हमें भगवान शिव के प्रति समर्पण और प्रेम की ओर प्रेरित करता है। जो कोई भी इस भजन को सच्चे मन से पढ़े या करे, उसे शिव कृपा का साक्षात्कार अवश्य होता है। अगर आपको यह भजन पसंद आया हो, तो “भोले गिरीजापति शंकर हमें तेरा सहारा है”, “मेरे नाथ केदारा तेरे नाम का सहारा”, “महाकाल की नगरी में मकान‌ होना‌ चाहिए” और “भोले बाबा तेरी महिमा अपार माया तेरी तू ही जाने” जैसे अन्य शिव भजनों को भी ज़रूर पढ़े और शिव भक्ति में लीन हो जाएं।


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