Jag Ke Vo Dukh Hare Sukh Barsaye
रचना बनाकर आप खेले वो खिलाड़ी,
कहीं पर बना वो राजा कहीं पर भिखारी,
रोने लगा हार के वो जीत के हसाए,
जग के वो दुख हरे सुख बरसाए….
बाघाम्बर लपेटें वो पहने नाग माला,
हाथ में त्रिशूल धरे नाम भोला भाला,
दीनो पर दयाल होकर लक्ष्मी लुटाए,
जग के वो दुख हरे सुख बरसाए….
स्वर्ग से उतारी गंगा जटा में समाई,
भक्तों को तारने वो धरती पर आई,
भाल नेत्र ज्वाला से वो पापों को जलाए,
जग के वो दुख हरे सुख बरसाए….
महादेव महादानी जग रखवाला,
शरण में आए को वो कर दे निहाला,
उसकी लीला कौन जाने उसके सिवाय,
जग के वो दुख हरे सुख बरसाए….

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile