Dulha Ban Aaye Tripurari
दूल्हा बन आए, त्रिपुरारी रे,,, त्रिपुरारी ll
हो के बैल पे सवार, पहनें सर्पों के हार ll,,
लागे सुंदर छवि प्यारी रे,,, त्रिपुरारी,
दूल्हा बन आए,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
गंगा को प्रभु जी, शीश पे धारे,
कानों में सर्पों के, कुण्डल डारे ll
सर्पों की माला है, कण्ठ में डाला है ll,,
श्री चंद्र धारी रे,,, त्रिपुरारी,
दूल्हा बन आए,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
मरघट की राख़ को, अंग रमाए,
कंठ पे काले काले, नाग लहराए ll
*मस्तक विशाला है, त्रिनेत्र वाला है ll,,
त्रिशूल धारी रे,,, त्रिपुरारी,
दूल्हा बन आए,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
भंग धतूरे को, खाने वाला,
सब देवों में, देव निराला ll
सर्प और ततैईया है, बिच्छू बरैईया है ll,,
बाग्मबर धारी रे,,, त्रिपुरारी,
दूल्हा बन आए,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
ब्रह्मा विष्णु, देव बाराती,
भूत प्रेत सब, संगी साथी ll
रूप विशाला है, सब से निराला है ll,,
राजेंद्र छवि प्यारी रे,,, त्रिपुरारी,
दूल्हा बन आए,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile