Dukh Mere Haro
चंदन चावल बेल की पतिया,
शिव जी के माथे धरो, हे भोलानाथ दिगंबर,
ये दुख मेरे हरो, हरो रे….
अगर चंदन का बश्म चढ़ाउ, शिव जी के पैयाँ पडु,
नंदी उपर स्वार भयो रामा, मस्तक गंगा धरो,
ये दुख मेरे हरो……
शिव शंकर जी को तीन नेत्र हैं, अद्भुत रूप धरो,
अर्धंगी गौरी पुत्र गजानन, चंद्रमा माथे धरो,
ये दुख मेरे हरो…
आसन दाल सिंहासन बैठे, शांति समाधि धरो,
कंचन थाल कपूर की बाती, शिव जी की आरती करो,
ये दुख मेरे हरो…..
मीरा के प्रभु गिरधरनागर चरणो में शीश धरो,
हे भोलानाथ दिगंबर मोरे, ये दुख मोरे हरो,
सब दुख मोरे हरो…..
चंदन चावल बेल की पतिया, शिव जी के माथे धरो,
हे भोलानाथ दिगंबर सब दुख मोरे हरो रे…..

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile