Dhol Baabe De Viyah Vich
मुंडा अपने विआह विच नचदा फिरे मुंडा अपने
लै लै हुलारे कोई नचदा फिरे, नचदा फिरे ते कोई टपदा फिरे,
गज्जदा फिरे ते कोई वसदा फिरे,
ढोल बाबे दे, ढोल बाबे दे विआह विच वजदा फिरे-ढोल,
शिव भोले दे विआह दा बड़ा चा ए,
दिन चौदश दा गया अज आए।।
झूम झूम सिर पैर पए उठदे, मौज़ मस्ती बाराती पए लुटवे,
बैठा बैल उत्ते लाड़ा, सेहरा चकदा फिरे नी-ढोल बाबे दे
हर पासे अज रौनकां सवाईयां ने, शिव भगतां नूं मिलीयां वधाईयां ने।।
शिवगण देखो किड्रे सोहने लगदे, देख देख शिव भोले वल नचदे
नच नच, इक दूजे विच वजदा फिरे नी ढोल बाबे दे
बड़े खुश राजा रानी, खुश लोक ने, शिव दरस पा मिट गए शोक ने।।
भाग गौरां दे’मधुप ‘अज जागे ने। आए वरन कैलाशपति राजे ने,
मींह खुशीयां दा हर पासे वसदा फिरे नी-ढोल बाबे दे,

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile