Chita Ki Bhasm Rama Ke
चिता की भस्म रमाके,
श्रृंगार करने वाला,
कितना सुंदर लागे भोला,
कितना लागे प्यारा…..
शिश पे चंदा साजे,
जटा में गंग विराजे,
भक्त दिवाने होते हैं,
जब जब भोले का डमरू बाजे,
हे चंदा यह महादेव,
तारे हे जग ये सारा,
कितना सुंदर लागे भोला,
कितना लागे प्यारा….
बदन पे मृग की छाल,
तेरे गले में मुण्ड की माल,
हाथ कमण्डल साजे,
लाचार खड़ा हे काल,
हवा में सर सर करता,
तेरे गले में नाग है काला,
कितना सुंदर लागे भोला,
कितना लागे प्यारा….
नंदी पे सवारी करता,
भांग धतूरे पे मरता,
गोरा न घोंटे भांग तो,
भोले का मन है जलता,
निल कंठ है महादेव,
जग का है रखवाला,
कितना सुंदर लागे भोला,
कितना लागे प्यारा….

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile