भूतेश्वर ने ध्यालो जी सोया भाग्य जगा लो जी लिरिक्स

भूतेश्वर ने ध्यालो जी, सोया भाग्य जगा लो जी — यह भजन महादेव की करुणा और कृपा का प्रतीक है। जब जीवन में कठिनाइयाँ आती हैं और भाग्य साथ नहीं देता, तब केवल शिव की भक्ति ही मार्ग प्रशस्त करती है। भोलेनाथ, जो स्वयं आशुतोष हैं, अपने भक्तों के कष्ट हर लेते हैं और उन्हें नए अवसर प्रदान करते हैं। इस भजन में हम शिवजी की असीम दयालुता का गुणगान करेंगे और उनकी कृपा पाने का आह्वान करेंगे। आइए, इस भक्तिमय यात्रा में हम भी शिव के चरणों में शीश नवाएं।

Bhuteshvar Ne Dhyalo Ji Soya Bhagya Jaga Lo Ji

भूतेश्वर ने ध्यालो जी,
सोया भाग्य जगा लो जी,
भगता रो यो रखपाल,
बैठ्यो भोलो धणी।1।

माथे ऊपर चंदा सोहे,
जटा में गंग विराजे रे,
मुकुट मणि री आभा सोहे,
नाग गले में साजे रे,
आ ने आज रिझा ल्यो जी,
बिगड़ा काम बणाल्यो जी,
भगता रो यो रखपाल,
बैठ्यो भोलो धणी।2।

आक धतूरा खावे बाबो,
भंगिया भोग लगावे रे,
अंग भभूत रमावे भोलो,
धुनि अलख जगावे रे,
गंगा जल सु नहा ल्यो जी,
काचो दूध चढ़ा ल्यो जी,
भगता रो यो रखपाल,
बैठ्यो भोलो धणी।3।

नीलकंठ बाबा को म्हाने,
रूप सुहानो लागे रे,
भोला जी को ध्यान धरया सु,
सगला संकट भागे रे,
भक्तो मिलकर ध्यालो जी,
सगळा कष्ट मिटा ल्यो जी,
भगता रो यो रखपाल,
बैठ्यो भोलो धणी।4।

सोमवार ने भूतनाथ,
दर्शन री महिमा भारी रे,
निशदिन माथो टेकन,
आवे नर ने नारी रे,
‘हर्ष’ के सागे चालो जी,
जाकर दर्शन पा लो जी,
भगता रो यो रखपाल,
बैठ्यो भोलो धणी।5।

भूतेश्वर ने ध्यालो जी,
सोया भाग्य जगा लो जी,
भगता रो यो रखपाल,
बैठ्यो भोलो धणी।6।

महादेव अपने भक्तों पर सदा कृपा दृष्टि रखते हैं। जो भी सच्चे मन से शिव का ध्यान करता है, उसके सोए हुए भाग्य जाग जाते हैं और जीवन सुखमय हो जाता है। शिव की महिमा अनंत है, और उनकी भक्ति से बढ़कर कोई साधना नहीं। यदि यह भजन आपके हृदय को शिवमय कर रहा है, तो शिव ही बसे हैं कण-कण में, भोले के हाथों में है भक्तों की डोर, महाकाल की लगन, और शरण में हम तुम्हारे आ पड़े हैं जैसे अन्य शिव भजनों को भी अवश्य करें। हर हर महादेव! ????????

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