Bhootnath Ke Dware Pe
भूतनाथ के द्वार पे जो भी,
अपना शीष, झुका देता है,
चिन्ताओं की सारी लक़ीरें,
बाबा भूतनाथ मिटा देता है…….
ज़माने की ठोकरें,
जो खाकर के हारा,
वो इस दर पे आकर,
ना रहता बेचारा,
भूतनाथ से, बढ़के न कोई,
देव है अलबेला,
कोई देव है अलबेला,
उम्मीदों कोआशाओं को
बाबा टूटने ही नहीं देता है…………
मेरा शिव बम भोला बड़ा ही है भोला,
जो मांगो सब देता ऐसा है मस्त मौला,
मालिक तीनों लोकों का है,
फिर भी हैं बैरागी,
भोले फिर भी हैं बैरागी,
रखता चिता की राख़ स्वयं ये,
बाक़ी सबकुछ.ही लुटा देता है…..
गुरू महिपाल जी की
श्रद्धा और भक्ति ने
जगाई इस दर की
अलख ज्योति जग में
कोटि-कोटि नमन करूं महिपाल गुरू जी को
महिपाल गुरू जी को,
इस दरबार में.आने वाला,
ख़ुद को भाग्यशाली बना लेता है…….
भूतनाथ के द्वार पे जो भी,
अपना शीष झुका लेता है,
चिन्ताओं की सारी लक़ीरें,
बाबा भूतनाथ मिटा देता है……..

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile