भोले तेरे मंदिर में मैं दौड़ के आता हूँ भजन लिरिक्स

भोले तेरे मंदिर में मैं दौड़ के आता हूँ एक भावनात्मक और श्रद्धा से भरा हुआ भजन है, जिसमें भक्त अपनी पूरी श्रद्धा और प्रेम के साथ भगवान भोलेनाथ के मंदिर की ओर दौड़ते हुए जाते हैं। यह भजन भगवान शिव के प्रति गहरी भक्ति और उनके दर पर आने की तीव्र इच्छा को व्यक्त करता है। यहां भक्त महादेव के दरबार में पहुँचने के लिए अपने मन की समर्पण भावना को प्रकट करता है, और यह दर्शाता है कि शिव के दर्शन के बिना उसका जीवन अधूरा है। यह भजन शिव की कृपा पाने की निरंतर इच्छा और उनके मंदिर की पवित्रता को दर्शाता है।

Bhole Tere Maåndir Me Daud Ke Aata Hu

गम के समंदर में,
जब डूब जाता हूँ…
भोले तेरे मंदिर में,
मैं दौड़ के आता हूँ…
जोड़ के कहता हूँ मैं दोनों हाथ,
विनती सुनलो मेरी भोलेनाथ।।

तू दूर नाथ मुझसे,
कभी हो नहीं सकता…
तेरा भक्त हो जब दुःख में,
तू सो नहीं सकता,
हर कदम कदम पे भोले…
क्यों धोखा खाता हूँ,
भोले तेरे मंदिर मे,
मैं दौड़ के आता हूँ…
जोड़ के कहता हूँ मैं दोनों हाथ,
विनती सुनलो मेरी भोलेनाथ।।


गर तुम ना सुनोगे तो,
मैं किस दर पे जाऊं…
अपने दिल के छाले,
मैं किसको दिखलाऊं…
लाखो दुःख सहकर के,
फिर भी मुस्काता हूँ…
भोले तेरे मंदिर मे,
मैं दौड़ के आता हूँ..
जोड़ के कहता हूँ मैं दोनों हाथ,
विनती सुनलो मेरी भोलेनाथ।।

तेरे ‘भीमसेन’ को तो,
बस तेरा सहारा है…
बाबा तुम बिन जग में,
अब कौन हमारा है…
‘शर्मा’ कहे तुम बिन,
मैं रह नहीं पाता हूँ,
भोले तेरे मंदिर मे…
मैं दौड़ के आता हूँ,
जोड़ के कहता हूँ मैं दोनों हाथ,
विनती सुनलो मेरी भोलेनाथ।।

गम के समंदर में,
जब डूब जाता हूँ…
भोले तेरे मंदिर में,
मैं दौड़ के आता हूँ…
जोड़ के कहता हूँ मैं दोनों हाथ,
विनती सुनलो मेरी भोलेनाथ।।

भोलेनाथ के मंदिर में जाकर हम हमेशा उनकी कृपा और आशीर्वाद की प्राप्ति करते हैं। उनके मंदिर में जाकर हम अपने दिल की सारी पीड़ा और उलझनों को दूर करने की प्रार्थना करते हैं। शिवजी की भक्ति से हमारे जीवन में शांति और समृद्धि का संचार होता है। जैसे महाकाल की शरण में और भोले शंकर की शान जैसे भजन भी हमारे दिल में भगवान शिव के प्रति प्रेम और समर्पण को और अधिक प्रगाढ़ करते हैं, वैसे ही इस भजन के जरिए भी हम भगवान भोलेनाथ के दरबार में अपने मन और आत्मा को अर्पित करते हैं।

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