Bhole Parvat Ki Oonchi Chadhai Re
भोले पर्वत की ऊंची चढ़ाई रे,
मैं तो तेरे दर्शन को आई रे….
मैं तो जल भर कलसा लाई रे,
झाड़ों में ईलझ गई साड़ी रे,
सांप बिच्छू ने ऐसी डर आई रे,
मेरी गगरी छलक टी आई रे,
भोले पर्वत की ऊंची चढ़ाई रे,
मैं तो तेरे दर्शन को आई रे….
मैं तो चंदन केसर लाई रे,
समसानो को देख घबराई रे,
भूत प्रेतों ने ऐसी डराई रे,
मेरी केसर बिखरती आई रे,
भोले पर्वत की ऊंची चढ़ाई रे,
मैं तो तेरे दर्शन को आई रे….
मैं तो भंगिया घोट कर लाई रे,
तेरे द्वारे पर नंदी बैठी पाई रे,
नंदी ने मोहे समझाई रे,
भोले बाबा ने समाधि लगाई ले,
भोले पर्वत की ऊंची चढ़ाई रे,
मैं तो तेरे दर्शन को आई रे….
मैं तो हार गूथकर लाई रे,
भोले बाबा के गले पहनाई रे,
भोले बाबा ने पलके उठाई रे,
शिव गोरा के दर्शन पाई रे,
भोले पर्वत की ऊंची चढ़ाई रे,
मैं तो तेरे दर्शन को आई रे….

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile