Bhole Ki Dhoon Me Hoke Nachun Malang
मलंग मलंग मलंग
भोले की धुन में होके नाचूँ मलंग,
चढ़ने लगा है मुझे चढ़ने लगा है,
चढ़ने लगा है मुझे भोले का रंग,
भोले की धुन में होके नाचूँ मलंग…..
कोई नीलकंठ जटाधारी भोले,
कोई भोले कैलाशी,
मस्त मलंग वो अपनी धुन के पर्वत के वासी,
पीते है विष भोले पीते है भंग,
चढ़ने लगा है मुझे बोले का रंग,
भोले की धुन में होके नाचूँ मलंग…..
झूम रहा सारा कैलाश,
भोले जी की भक्ति में,
हाथ मे डमरू डम डम बजे,
गले मे सर्प की माला है,
ऐसा दण्डव करते भोले,
तीसरी आंख में ज्वाला है,
जटा में गंगा तेरे गौरा है संग,
चढ़ने लगा है मुझे बोले का रंग,
भोले की धुन में होके नाचूँ मलंग….

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile