Bhole Apna Daas Banake Rakh Le
सूलफे कि गांठ बाबा,
आँख राखै लाल यो,
काला काला माल,
गणा प्यारा लागै सै…..
जब लागज्या सै दो धम बाबा जी,
यो शहर मैंने फेर तो सबत न्यारा लागै सै,
इन पहाड़ा की आबादी बाबा लेव सै आजादी,
मैंने कुछ दिन अपणे तू पास राखले,
इस दुनिया तै बरग्या मन भोले नाथ ,
मैंने अपणा बणाकै न तू दास राखले….
तेरे लाडा का सू बूखा मेतो गणा भोले नाथ,
जिसत लगाया दिल वा भी छोड गई साथ,
इस चिलम के धम पै यो जिणा सीख लिया,
भोले आण क न मेरा इब पकड़ ले हाथ,
सुण नन्दी की तरहा भोले मैंने भी तू ,
अपणा इब तो बणा क खास राखले….

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile