भोला रे ज्यादा ते मत खइयो भंग के गोला रे

भोला रे ज्यादा ते मत खइयो भंग के गोला रे पढ़ने जा रहे हैं, वह भगवान शिव के सरल और भोले रूप का हल्के-फुलके अंदाज में बखान करता है। इस भजन में भगवान शिव के साथ-साथ उनके भक्तों की निःस्वार्थ भक्ति और भंग के माध्यम से शिव पूजा की परंपरा को दर्शाया गया है। हालांकि यह भजन मजाकिया अंदाज में है, फिर भी इसमें भगवान शिव की कृपा और उनके प्रति भक्तों के प्रेम का अहसास होता है।

Bhola Re Jyada Te Mat Khaiyo Bhang Ke Gola Re

भोला रे ज्यादा ते मत खइयो,
भंग के गोला रे,
गोला रे भोला गोला रे,
गोला रे भोला गोला रे,
भोला रे ज्यादा तें मत खइयो,
भंग के गोला रे।।

पीसत-पीसत गौरा थक गईं,
माथे निकरे पसीना,
लाख मनावें गौरा मैया,
तुम्हें परत ना चैना,
डोला रे भक्तों का मन,
देख के तेरा चोला रे,
डोला रे भोला डोला रे,
डोला रे भोला डोला रे,
भोला रे ज्यादा तें मत खइयो,
भंग के गोला रे।।

मस्त मगन है भोले बाबा,
संग में भूत बेताला,
एक हाथ में त्रिशूल बिराजे,
कम्मर में मृगछाला,
बोला रे डमरु भी तेरा डम-डम,
डम-डम बोला रे,
बोला रे भोला बोला रे,
बोला रे भोला बोला रे,
भोला रे ज्यादा तें मत खइयो,
भंग के गोला रे।।

सदा नशे में रहते शंभू,
भगत को कभी ना भूलें,
होती किरपा भक्तों पे इनकी,
चरणों को जो छूलें,
खोला रे ‘संजू’ की किस्मत,
का ताला खोला रे,
खोला रे भोला खोला रे,
खोला रे भोला खोला रे,
भोला रे ज्यादा तें मत खइयो,
भंग के गोला रे।।

भोला रे ज्यादा ते मत खइयो,
भंग के गोला रे,
गोला रे भोला गोला रे,
गोला रे भोला गोला रे,
भोला रे ज्यादा तें मत खइयो,
भंग के गोला रे।।

“भोला रे ज्यादा ते मत खइयो भंग के गोला रे” भजन हमें यह सिखाता है कि भगवान शिव का दरबार हर प्रकार की भक्ति को स्वीकार करता है, लेकिन भक्ति में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। जो भी इस भजन को श्रद्धा से पढ़े या नियमित रूप से करे, वह भगवान शिव की कृपा का अनुभव करेगा और जीवन में संतुलन और शांति बनाए रखेगा। यदि यह भजन आपके दिल को शांति और संतोष प्रदान करता है, तो “जो उज्जैन की शान है वो बाबा महाकाल है”, “महाकाल से मिलने चला सवारी वाला”, “भोले जी तेरे द्वार का दीवाना” और “शिव शंभू तेरी महिमा न्यारी” जैसे अन्य शिव भजनों को भी पढ़ें। ये भजन आपकी शिव भक्ति को और गहरा और सशक्त बनाएंगे।


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