Bhang Ka Sarur
बण गया सरूर और होया ढंग सै,
होया ढंग सै भोले होया ढंग सै,
लगा के घोटा आज मन्ने,
भोले या पीली तेरी भंग सै,
बण गया सरूर और होया ढंग सै,
होया ढंग सै भोले होया ढंग सै…..
फिर गए पैर मेरा ना सोधी में गात
खोल बताऊँ भोले तन्ने या बात,
कर दे ऐसी करामात कोई,
भगति का चढ़ ज्या यो रंग सै,
बण गया सरूर और होया ढंग सै,
होया ढंग सै भोले होया ढंग सै…..
तेरा भगत तो देखे तेरी बाट,
और तो लाग रहे सारे ठाट,
किसे चीज का तोडा ना,
नाचे मेरा अंग अंग सै,
बण गया सरूर और होया ढंग सै,
होया ढंग सै भोले होया ढंग सै…..
नाचूँ भोले पहन तेरी माला,
ना बाजी खेड़ी आला करे टाला,
मन्ने डरना सै किस बात ते,
जब शिव शंकर तू मेरे संग सै,
बण गया सरूर और होया ढंग सै,
होया ढंग सै भोले होया ढंग सै…..

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile