जब एक श्रद्धालु सच्चे मन से महादेव को पुकारता है, तो वे उसकी हर पीड़ा हर लेते हैं और उसे अपनी कृपा का अनुभव कराते हैं। भजन ओ शंकरा, मेरे शिव शंकरा इसी भक्तिभाव को प्रकट करता है, जहाँ एक भक्त महादेव को पुकारते हुए उनके अलौकिक स्वरूप और असीम दया की वंदना करता है। यह भजन हमें सिखाता है कि शिव जी की भक्ति में अपार आनंद और आंतरिक शांति समाहित है। आइए, इस भजन को पढ़कर हम भी शिव आराधना में रम जाएं।
Shankara Mere Shiv Sankara
ओ शंकरा मेरे शिव शंकरा।
बालक मैं तू पिता है,
तुझसे कुछ नही छिपा है।
शंकरा भोलेनाथ भोलेनाथ,
ओ शंकरा मेरें शिव शंकरा।
बालक मैं तू पिता है।।
अंग विभूति गले रुंड माला।
शमशानों का वासी बड़ा दयाला,
गंगा किनारे डेरा ओ लागे।
नन्दी संग तेरे भैरव साजे,
ओ शंकरा मेरें शिव शंकरा।
बालक मैं तू पिता है।।
शरण तुम्हारे जो भी आता।
खाली हाथ कभी ना जाता,
कृपा करो दया करो।
हे शिव शंकर हे अभ्यंकर,
ओ शंकरा मेरें शिव शंकरा।
बालक मैं तू पिता है।।
ओ शंकरा मेरे शिव शंकरा।
बालक मैं तू पिता है,
तुझसे कुछ नही छिपा है।
शंकरा भोलेनाथ भोलेनाथ,
ओ शंकरा मेरें शिव शंकरा।
बालक मैं तू पिता है।।
भोलेनाथ अपने भक्तों की पुकार सुनने वाले दयालु देव हैं। जो भी प्रेम और श्रद्धा से उन्हें पुकारता है, वे उसकी रक्षा करते हैं और उसे अपने आशीर्वाद से कृतार्थ करते हैं। यदि आप शिव भक्ति के और भी सुंदर भजनों को पढ़ना चाहते हैं, तो भोलेनाथ हैं वो, मेरे भोलेनाथ हैं, जय महाकाल, तेरी है महिमा अपार, उज्जैन नगरी देखो रे भैया, देवों से भरपूर है, और दरबार ये भोलेनाथ का है, यहाँ जो मांगो वो मिलता है जैसे अन्य भजनों को भी पढ़ें और शिव महिमा का आनंद लें। हर-हर महादेव! ????