Sai Sai Kahna Bhakto
भरो, हाज़री भरो, साईं की हाज़री* ll,
ज़रा, दोनों हाथ उठाओ ll,
साईं के दीवानों को, डर के नहीं रहना ll,
साईं साईं कहना भक्तो, साईं साईं कहना ll
^खड़े दर पे सवाली, सुनो दुखियों के बाली l
तेरी है शान निराली, ना लौटा कोई ख़ाली l
सदा रखी, लाज सब की, किसी से क्या कहना ll,
साईं साईं कहना भक्तो, साईं साईं कहना ll
साईं के दीवानों को, डर के,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
^चाँद पाटिल ने माना, महल शब्दी पहचाना l
श्याम था इनका दीवाना, बाईज़ा ने बेटा माना l
साईं जी के, दर्शन को, सब के तरसे नयना ll,
साईं साईं कहना भक्तो, साईं साईं कहना ll
साईं के दीवानों को, डर के,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
^सभी को गले लगाया, भेद आपस का मिटाया l
संत होया कोई ज्ञानी, सभी ने बात मानी l
हिन्दू मुस्लिम, सिख ईसाई, मिलजुल के रहना ll,
साईं साईं कहना भक्तो, साईं साईं कहना ll
साईं के दीवानों को, डर के,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं हेमानंद शास्त्री, एक साधारण भक्त और सनातन धर्म का सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य धर्म, भक्ति और आध्यात्मिकता के रहस्यों को सरल भाषा में भक्तों तक पहुँचाना है। शनि देव, बालाजी, हनुमान जी, शिव जी, श्री कृष्ण और अन्य देवी-देवताओं की महिमा का वर्णन करना मेरे लिए केवल लेखन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक साधना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से पूजन विधि, मंत्र, स्तोत्र, आरती और धार्मिक ग्रंथों का सार भक्तों तक पहुँचाने का प्रयास करता हूँ। जय सनातन धर्म