Manush Janam Anmol Re
मनुष जनम अनमोल रे,
मिट्टी मे ना रोल रे,
अब जो मिला है फ़िर ना मिलेगा,
कभी नही कभी नही रे,
ॐ साई नमो नमः,
श्री साई नमो नमः……
तु सत्संग मे आया कर,
गीत प्रभु के गाया कर,
साँझ सवेरे बेठ के बन्दे,
गीत प्रभु के गाया कर,
नही लगता कुछ मोल रे,
मिट्टी मे ना रोल रे,
अब जो मिला है फ़िर ना मिलेगा,
कभी नही कभी नही रे……..
तु है बूद बूद पानी का,
मत कर जोर जवानी का,
समझ समझ के क़दम रखो,
पता नही ज़िन्दगानी का,
सबसे मीठा बोल रे,
मिट्टी मे ना रोल रे,
अब जो मिला है फ़िर ना मिलेगा,
कभी नही कभी नही रे……
मतलब का संसार है,
इसका क्या ऐतबार है,
सम्भल सम्भल के क़दम रखो,
फूल नही अंगार है,
मन की आँखे खोल रे,
मिट्टी मे ना रोल रे,
अब जो मिला है फ़िर ना मिलेगा,
कभी नही कभी नही रे……

मैं हेमानंद शास्त्री, एक साधारण भक्त और सनातन धर्म का सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य धर्म, भक्ति और आध्यात्मिकता के रहस्यों को सरल भाषा में भक्तों तक पहुँचाना है। शनि देव, बालाजी, हनुमान जी, शिव जी, श्री कृष्ण और अन्य देवी-देवताओं की महिमा का वर्णन करना मेरे लिए केवल लेखन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक साधना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से पूजन विधि, मंत्र, स्तोत्र, आरती और धार्मिक ग्रंथों का सार भक्तों तक पहुँचाने का प्रयास करता हूँ। जय सनातन धर्म