विधना तेरे लेख किसी की समझ ना आते हैं भजन लिरिक्स

इस संसार की सच्चाई यह है कि विधि का खेल सभी के लिए एक रहस्य होता है। विधना तेरे लेख किसी की समझ ना आते हैं भजन में हम उन अनजानी राहों की बात करते हैं, जिन्हें हम नहीं समझ पाते, फिर भी विश्वास रखते हुए आगे बढ़ते हैं। जीवन के उन उतार-चढ़ावों में जब हम थक जाते हैं, तब हमें यह याद दिलाता है कि सब कुछ प्रभु की इच्छा से ही होता है। इस भजन को पढ़ने से मन में एक नया संकल्प जागता है, आइए इसे साथ में महसूस करें और अपनाएं।

Vidhata Tere Lekh Kisi Ki Samajh Naa Aate Hai

दोहा –
व्याकुल दशरथ के लगे,
रथ के पथ पर नैन।
रथ विहीन वन वन फिरें,
राम सिया दिन रेन।।

विधना तेरे लेख किसी की,
समझ ना आते हैं
जन जन के प्रिय राम लखन सिय,
वन को जाते हैं।।

एक राजा के राज दुलारे,
वन वन फिरते मारे मारे
होनी होकर रहे कर्म गति,
टरे नहीं काहूँ के टारे
सबके कष्ट मिटाने वाले,
कष्ट उठाते हैं
जन जन के प्रिय राम लखन सिय,
वन को जाते हैं।।

फूलों से चरणों में काँटे,
विधि ने क्यों दु:ख दीन्हे ऐसे
पग से बहे लहु की धारा,
हरि चरणों से गंगा जैसे
सहज भाव से संकट सहते,
और मुस्काते हैं
जन जन के प्रिय राम लखन सिय,
वन को जाते हैं।।

राजमहल में पाया जीवन,
फूलों में हुआ लालन पालन
राजमहल के त्याग सभी सुख,
त्याग अयोध्या त्याग सिंहासन
कर्म निष्ठ हो अपना अपना,
धर्म निभाते हैं
महलों के वासी जंगल में,
कुटि बनाते हैं।।

कहते हैं देवों ने आकर,
भील किरात का भेष बनाकर
पर्णकुटी रहने को प्रभु के,
रखदी हाथों हाथ सजाकर
सिया राम की सेवा करके,
पुण्य कमाते हैं
महलों के वासी जंगल में,
कुटि बनाते हैं।।

विधना तेरे लेंख किसी की,
समझ ना आते हैं
जन जन के प्रिय राम लखन सिय,
वन को जाते हैं।।

विधना तेरे लेख किसी की समझ ना आते हैं भजन हमें यह सिखाता है कि जीवन में जो भी होता है, वह प्रभु की योजना का हिस्सा है, जिसे समझना हमारे लिए मुश्किल हो सकता है। इस तरह के भजन हमें आत्मनिर्भर बनाते हैं और विश्वास दिलाते हैं। श्रीराम के अन्य भजनों को पढ़ें जैसे राम से बड़ा राम का नाम जो सुमिरे भव पार हो जाए, राम नाम जप ले एक यही संग जाई राम सुमिरले भाई, राघव को मैं ना दूंगा मुनिनाथ मरते मरते और कब सुधि लोगे मेरे राम। प्रभु की योजना में ही हमारी भलाई है। जय श्रीराम!

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