वनवास मेरे प्राण का प्यारा चला गया भजन लिरिक्स

वनवास मेरे प्राण का प्यारा चला गया इस भावपूर्ण भजन में माता सीता का वह करुण विलाप झलकता है जब श्रीराम वनवास के लिए प्रस्थान करते हैं। मैं, पंडित सत्य प्रकाश, इस भजन के माध्यम से आपको उस पीड़ा से जोड़ने का प्रयास कर रहा हूँ जिसे जनकनंदिनी सीता जी ने महसूस किया। यह भजन न केवल श्रीराम जी के त्याग की कथा कहता है, बल्कि उनके साथ हर पल जुड़ी सच्ची भक्ति और प्रेम को भी दर्शाता है।

Vanvas Mere Pran Ka Pyara Chala Gaya

वनवास मेरे प्राण का,
प्यारा चला गया
मेरी ज़िन्दगी का राम,
सहारा चला गया।।

कैकई ने ज़ुल्म ढाया है,
वचनों को मांग कर
चौदह बरस को आँख का,
तारा चला गया
वनवास मेरें प्राण का,
प्यारा चला गया।।

भाई लखन व सीता भी,
सब साथ हो लिए
हाय अवध से राज,
दुलारा चला गया
वनवास मेरें प्राण का,
प्यारा चला गया।।

है दिल पे दौर ऐसे,
हम कैसे जी सकेंगे
हम से बिछड़ के लाल,
हमारा चला गया
वनवास मेरें प्राण का,
प्यारा चला गया।।

यह राम की जुदाई,
ऐसे ‘पदम्’ ने गायी
जैसे अवध का राज,
दुलारा चला गया
वनवास मेरें प्राण का,
प्यारा चला गया।।

वनवास मेरे प्राण का,
प्यारा चला गया
मेरी ज़िन्दगी का राम,
सहारा चला गया।।

श्रीराम जी के वनगमन का दृश्य हर रामभक्त के हृदय को विह्वल कर देता है। वनवास मेरे प्राण का प्यारा चला गया भजन उनके चरित्र की महानता और मर्यादा को दर्शाता है। यदि आप श्रीराम की भक्ति में और अधिक डूबना चाहते हैं तो पुण्य भूमि ये चित्रकूट की जहाँ बसे श्रीराम, राम से लगी डोरी श्याम से लगी, मेरे घर राम आए हैं और जगमग हुई अयोध्या नगरी संत करें गुणगान जैसे अन्य भजनों को भी अवश्य पढ़ें और प्रभु श्रीराम की भक्ति में मन लगाएं। जय श्रीराम!

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