श्री रामायण प्रारम्भ स्तुति हिंदी लिरिक्स

प्रिय भक्तों, आज हम पावन श्री रामायण प्रारम्भ स्तुति का भावपूर्ण पाठ प्रस्तुत कर रहे हैं, जो राम कथा के शुभारम्भ में प्रभु श्रीराम के चरणों में समर्पित होती है। मैं, पंडित सत्य प्रकाश, आपको आमंत्रित करता हूँ इस स्तुति को पढ़ने और अपने हृदय को प्रभु श्रीराम की भक्ति में रंगने के लिए।

Shri Ramayan Prarambh Stuti

जो सुमिरत सिधि होइ गन नायक करिबर बदन।
करउ अनुग्रह सोइ बुद्धि रासि सुभ गुन सदन।।1।।

मूक होइ बाचाल पंगु चढइ गिरिबर गहन।
जासु कृपाँ सो दयाल द्रवउ सकल कलि मल दहन।।2।।

नील सरोरुह स्याम तरुन अरुन बारिज नयन।
करउ सो मम उर धाम सदा छीरसागर सयन।।3।।

कुंद इंदु सम देह उमा रमन करुना अयन।
जाहि दीन पर नेह करउ कृपा मर्दन मयन।।4।।

बंदउ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि।
महामोह तम पुंज जासु बचन रबि कर निकर।।5।।

श्री रामायण प्रारम्भ स्तुति प्रभु राम की कृपा प्राप्त करने का अत्यंत प्रभावशाली माध्यम है। जो भी इसे पढ़े या करे, उसके जीवन में निश्चित ही शुभता और दिव्यता उतरती है। इसी भाव से आप राम नाम का अमृत पीले, राम के गीत सुनाते चलो, राम शरण में आजा तू, और राम नाम तू जप ले रे बंदे जैसे अन्य राम भजनों को भी जरूर पढ़ें और प्रभु श्रीराम की भक्ति में लीन हों।

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