Re Man Ye Do Din Ka Mela Rahega
रे मन ये दो दिन का मेला रहेगा…
कायम ना जग का झमेला रहेगा।।
श्लोक – प्रबल प्रेम के पाले पड़कर,
प्रभु को नियम बदलते देखा…
अपना मान टले टल जाये,
पर भक्त का मान ना टलते देखा।
रे मन ये दो दिन का मेला रहेगा…
कायम ना जग का झमेला रहेगा।।
किस काम ऊँचा जो तू,
महला बनाएगा,
किस काम का लाखो का जो,
तोड़ा कमाएगा…
रथ हाथियों का झुण्ड भी,
किस काम आएगा,
जैसा तू यहाँ आया था।।
वैसा ही जाएगा,
तेरी सफर में सवारी की खातिर,
तेरी सफर में सवारी की खातिर,
कंधो पे ठठरी का ठेला रहेगा…
रे मन यें दो दिन का मेला रहेगा,
कायम ना जग का झमेला रहेगा।।
कहता है ये दौलत कभी,
आएगी मेरे काम,
पर यह तो बता धन हुआ,
किसका भला गुलाम,
समझा गए उपदेश,
हरिश्चंद्र कृष्ण राम,
दौलत तो नहीं रहती है,
रहता है सिर्फ नाम।।
छूटेगी सम्पति यहाँ की यहीं पर,
छूटेगी सम्पति यहाँ की यहीं पर,
तेरी कमर में ना अधेला रहेगा,
रे मन यें दो दिन का मेला रहेगा,
कायम ना जग का झमेला रहेगा।।
साथी है मित्र गंगा के,
जल बिंदु पान तक,
अर्धांगिनी बढ़ेगी तो,
केवल मकान तक।।
परिवार के सब लोग,
चलेंगे मशान तक,
बेटा भी हक़ निभाएगा,
तो अग्निदान तक…
इसके तो आगे भजन ही है साथी,
इसके तो आगे भजन ही है साथी,
हरी के भजन बिन तू अकेला रहेगा,
रे मन यें दो दिन का मेला रहेगा,
कायम ना जग का झमेला रहेगा।।
रे मन ये दो दिन का मेला रहेगा…
कायम ना जग का झमेला रहेगा।।

मैं आचार्य ब्रह्मदत्त, सनातन धर्म का एक साधक और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचारक हूँ। मेरा जीवन देवी-देवताओं की आराधना, वेदों-पुराणों के अध्ययन और भक्ति मार्ग के अनुसरण में समर्पित है। सूर्य देव, खाटू श्याम, शिव जी और अन्य देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान करना मेरे लिए केवल एक लेखन कार्य नहीं, बल्कि एक दिव्य सेवा है। मैं अपने लेखों के माध्यम से भक्तों को पूजन विधि, मंत्र, स्तोत्र, आरती और धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान सरल भाषा में प्रदान करने का प्रयास करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने आध्यात्मिक पथ को सुगम और सार्थक बना सके। View Profile