राम भक्त ही राज करेगा दिल्ली के सिंहासन पर भजन में भगवान श्रीराम के भक्तों की विजय और उनके आशीर्वाद की महिमा का वर्णन किया गया है। यह भजन हमें यह सिखाता है कि भगवान श्रीराम की भक्ति और उनके आदर्शों का पालन करने से न केवल व्यक्ति की आत्मा पवित्र होती है, बल्कि उसे सच्चे शाशक बनने की शक्ति भी मिलती है। भजन में यह संदेश है कि जो राम भक्त होते हैं, वे जीवन में हर संकट को पार करके विजय प्राप्त करते हैं, और अंततः उनका राज्य होता है – चाहे वह दिल हो या संसार।
Ram Bhakt Hi Raj Karega Delhi Ke Sinhasan Par
तय कर लो अब सत्य सनातन,
की छाया हो शासन पर,
राम भक्त ही राज करेगा,
दिल्ली के सिंहासन पर,
राम प्रतिष्ठित किए जिन्होंने,
अवधपुरी के आसन पर,
रामभक्त हि राज करेगा,
दिल्ली के सिंहासन पर,
जय श्री राम जय श्रीराम,
जय श्रीराम जय श्रीराम।1।
संसद की चौखट को वंदन,
लोकतंत्र को मान मिला,
दुनिया भर में भारत माता,
को अपनी सम्मान मिला,
सात दशक तक हमने देखा,
जिसको सहमा डरा डरा,
एक दशक में अंबर हमको,
निर्भय हिंदुस्तान मिला,
विश्वासों को सदा सहारा,
जहां मिले अनुशासन पर,
रामभक्त हि राज करेगा,
दिल्ली के सिंहासन पर,
जय श्री राम जय श्रीराम,
जय श्रीराम जय श्रीराम।2।
जिस भारत ने माना हरदम,
घट घट के है वासी राम,
समता सुख और समृद्धि के,
सदा रहे अऩुप्रासी राम,
त्रेता में तो 14 वर्षों का ही,
बस बनवास मिला,
पांच सदी तक पर कलयुग में,
बने रहे वनवासी राम,
जग बलिहारी जाएं अपने,
परम प्रभु के दर्शन पर,
रामभक्त हि राज करेगा,
दिल्ली के सिंहासन पर,
जय श्री राम जय श्रीराम,
जय श्रीराम जय श्रीराम।3।
तय कर लो अब सत्य सनातन,
की छाया हो शासन पर,
राम भक्त ही राज करेगा,
दिल्ली के सिंहासन पर,
राम प्रतिष्ठित किए जिन्होंने,
अवधपुरी के आसन पर,
रामभक्त हि राज करेगा,
दिल्ली के सिंहासन पर,
जय श्री राम जय श्रीराम,
जय श्रीराम जय श्रीराम।4।
राम भक्त ही राज करेगा दिल्ली के सिंहासन पर भजन में हम देख सकते हैं कि भगवान श्रीराम के भक्तों का स्थान हमेशा सर्वोत्तम होता है। जैसे कि राम नाम का सुमिरन करले खुश होंगे हनुमान रे और राम के भक्तो पे चढ़ गया राम नाम का पारा भजनों में भक्ति के प्रभाव को दर्शाया गया है, वैसे ही यह भजन भी यह साबित करता है कि राम के भक्त किसी भी सिंहासन पर विराजित हो सकते हैं। श्रीराम के मार्ग पर चलकर जीवन में सच्चे सुख, समृद्धि और शांति प्राप्त की जा सकती है। जय श्रीराम!

मैं आचार्य ब्रह्मदत्त, सनातन धर्म का एक साधक और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचारक हूँ। मेरा जीवन देवी-देवताओं की आराधना, वेदों-पुराणों के अध्ययन और भक्ति मार्ग के अनुसरण में समर्पित है। सूर्य देव, खाटू श्याम, शिव जी और अन्य देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान करना मेरे लिए केवल एक लेखन कार्य नहीं, बल्कि एक दिव्य सेवा है। मैं अपने लेखों के माध्यम से भक्तों को पूजन विधि, मंत्र, स्तोत्र, आरती और धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान सरल भाषा में प्रदान करने का प्रयास करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने आध्यात्मिक पथ को सुगम और सार्थक बना सके। View Profile