Par Hoga Vahi Jise Pakadoge Ram
पार होगा वही,
जिसे पकड़ोगे राम…
जिसको छोड़ोगे,
पलभर में डूब जाएगा।।
तिरना क्या जाने,
पत्थर बेचारे,
तिरने लगे तेरे,
नाम के सहारे,
नाम लिखते आ गए है…
पत्थर में प्राण,
जिसको छोड़ोगे,
पलभर में डूब जाएगा।
पार होगा वहीँ,
जिसे पकड़ोगे राम…
जिसको छोड़ोगे,
पलभर में डूब जाएगा।।
लंका जलाई,
लांघा समुन्दर,
राक्छस को मार आया,
छोटा सा बन्दर,
बस जपता रहा…
दिन रात तेरा नाम,
जिसको छोड़ोगे,
पलभर में डूब जाएगा।
पार होगा वहीँ,
जिसे पकड़ोगे राम…
जिसको छोड़ोगे,
पलभर में डूब जाएगा।।
सुनकर के बाते,
मुस्काए राम जी,
मारे ख़ुशी के नाचे,
हनुमान जी…
भक्त देखा ना,
बनवारी तेरे समान,
जिसको छोड़ोगे,
पलभर में डूब जाएगा।
पार होगा वहीँ,
जिसे पकड़ोगे राम…
जिसको छोड़ोगे,
पलभर में डूब जाएगा।।
पार होगा वही,
जिसे पकड़ोगे राम,
जिसको छोड़ोगे…
पलभर में डूब जाएगा,
जिसको छोड़ोगे,
पलभर में डूब जाएगा।।

मैं आचार्य ब्रह्मदत्त, सनातन धर्म का एक साधक और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचारक हूँ। मेरा जीवन देवी-देवताओं की आराधना, वेदों-पुराणों के अध्ययन और भक्ति मार्ग के अनुसरण में समर्पित है। सूर्य देव, खाटू श्याम, शिव जी और अन्य देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान करना मेरे लिए केवल एक लेखन कार्य नहीं, बल्कि एक दिव्य सेवा है। मैं अपने लेखों के माध्यम से भक्तों को पूजन विधि, मंत्र, स्तोत्र, आरती और धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान सरल भाषा में प्रदान करने का प्रयास करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने आध्यात्मिक पथ को सुगम और सार्थक बना सके। View Profile