Mujhe Chad Gaya Bhagava Rang Rang
ये भगवा रंग, रंग रंग,
जिसे देख जमाना हो गया दंग,
जिसे ओढ़ के नाचे रे बजरंग।।
मुझे चढ़ गया भगवा रंग रंग,
मुझे चढ़ गया भगवा रंग रंग।।
ये भगवा रंग है ऋषि मुनि,
और संतो का,
हिन्द के वीर बलियो का।।
और महंतो का,
मुझें चढ़ गया भगवा रँग रंग,
मुझें चढ़ गया भगवा रंग रंग।।
ये रंग रंग लिया माँ भारती के,
वीर लालो ने,
नही घुल सकता है ता जिंदगी।।
नदियों ना तालों में,
मुझें चढ़ गया भगवा रँग रंग,
मुझें चढ़ गया भगवा रंग रंग।।
ये वो रंग है जो जनक लली के,
मस्तक से आया है,
जिसे अंजना के लल्ला ने।।
चोले में लगाया है,
मुझें चढ़ गया भगवा रँग रंग,
मुझें चढ़ गया भगवा रंग रंग।।
ये वो रंग है जो श्री राम जी के,
मन को भाया है,
अवध को छोड़ते समय प्रभु ने।।
तन रंगाया है,
मुझें चढ़ गया भगवा रँग रंग,
मुझें चढ़ गया भगवा रंग रंग।।
सुनो जी पार्थ को भारत भूमि में,
यह रंग चढ़ गया,
न्याय और नित के पीछे वो।।
अपनो से लड़ गया,
मुझें चढ़ गया भगवा रँग रंग,
मुझें चढ़ गया भगवा रंग रंग।।
ये भगवा रंग, रंग रंग,
जिसे देख जमाना हो गया दंग,
जिसे ओढ़ के नाचे रे बजरंग।।
मुझें चढ़ गया भगवा रंग रंग,
मुझें चढ़ गया भगवा रंग रंग।।

मैं आचार्य ब्रह्मदत्त, सनातन धर्म का एक साधक और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचारक हूँ। मेरा जीवन देवी-देवताओं की आराधना, वेदों-पुराणों के अध्ययन और भक्ति मार्ग के अनुसरण में समर्पित है। सूर्य देव, खाटू श्याम, शिव जी और अन्य देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान करना मेरे लिए केवल एक लेखन कार्य नहीं, बल्कि एक दिव्य सेवा है। मैं अपने लेखों के माध्यम से भक्तों को पूजन विधि, मंत्र, स्तोत्र, आरती और धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान सरल भाषा में प्रदान करने का प्रयास करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने आध्यात्मिक पथ को सुगम और सार्थक बना सके। View Profile