मैं तो पत्थर उठा नहीं पाई के बालू ले आई भजन लिरिक्स

भक्ति में भाव की प्रधानता है, और यही संदेश हमें मैं तो पत्थर उठा नहीं पाई के बालू ले आई भजन में मिलता है। इस सुंदर रचना के माध्यम से यह समझाया गया है कि प्रभु श्रीराम को भक्ति में किया गया हर छोटा कार्य भी अत्यंत प्रिय होता है, यदि उसमें सच्चा समर्पण और प्रेम हो। यह भजन हर उस भक्त की भावनाओं को छूता है जो अपनी सीमित क्षमताओं के बावजूद प्रभु के चरणों में कुछ अर्पित करने की भावना रखता है।

Main to Patthar Utha Nahi Payi Ke Balu le Aayi

दोहा –
एक गिलहरी बार बार,
सागर में पूंछ भिगावे,
पूंछ भिगावे रेत लपेटे,
पुल पे आन गिरावे।
बड़े नुकीले पत्थर प्रभु तेरे,
पाँव में ना चुभ जावे,
बालू आपकी राह को भगवन,
कितना सुगम बनावे।

देख वानरों की सेवा महान,
मेरे दिल में जगे है अरमान,
मैं तो पत्थर उठाय नहीं पाई,
के बालू ले आई।।

बड़े बड़े वानरों की,
बडी बडी बात है,
मैं छोटी सी गिलहरी प्रभु,
मेरी क्या बिसात है,
मेरे दिल में जगे ये अरमान,
तेरी सेवा करू मैं मेरे राम,
मैं तो पत्थर उठाय नहीं पाई,
के बालू ले आई।।

छोटी सी सेवा,
स्वीकारो प्रभु जी,
सबको है तारा मोहे,
तारो प्रभु जी,
ले लो अपनी शरण में मेरे राम,
मेरे दिल में जगे ये अरमान,
मैं तो पत्थर उठाय नहीं पाई,
के बालू ले आई।।

तेरी ये सेवा ना भूले रघुराई,
युगों युगों कथा तेरी जाएगी सुनाई,
तेरा रघुकुल पे है ये अहसान,
तेरे दिल में जगे ये अरमान,
तू तो पत्थर उठाय नहीं पाई,
के बालू ले आई।।

देख वानरों की सेवा महान,
मेरे दिल में जगे है अरमान,
मैं तो पत्थर उठा नहीं पाई,
के बालू ले आई।।

मैं तो पत्थर उठा नहीं पाई के बालू ले आई भजन यह सिद्ध करता है कि प्रभु श्रीराम भावना के भूखे हैं, भव्यता के नहीं। सच्चे हृदय से किया गया हर प्रयास प्रभु को प्रसन्न करता है। यदि आपकी भक्ति में निष्कलंक प्रेम और समर्पण है, तो श्रीराम अवश्य स्वीकार करते हैं। इसी भाव को और गहराई से समझने हेतु अगर राघव के चरणों में जगह थोड़ी सी मिल जाए, राम नाम का प्याला प्यारे पी ले सुबहो शाम, प्रभु मैंने तुम्हे पार किया तुम मोहे पार करो, और हे राम मेरे तुझको भक्तों ने पुकारा है जैसे अन्य भजनों को भी पढ़ें और श्रीराम की कृपा के पात्र बनें। जय श्रीराम! ????????

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