Lakshmnan Sa Bhai Ho Kaushalya Mai Ho
लक्ष्मण सा भाई हो,
कौशल्या माई हो,
स्वामी तुम जैसा…
मेरा रघुराई हो,
स्वामी तुम जैसा…
मेरा रघुराई हो।।
नगरी हो अयोध्या सी,
रघुकुल सा घराना हो,
चरण हो राघव के…
जहाँ मेरा ठिकाना हो,
चरण हो राघव के…
जहाँ मेरा ठिकाना हो।।
हो त्याग भरत जैसा,
सीता सी नारी हो,
लव कुश के जैसी…
संतान हुमारी हो,
लव कुश के जैसी…
संतान हुमारी हो।।
श्रद्धा हो श्रवण जैसी,
शबरी सी भक्ति हो,
हनुमत के जैसी…
निष्ठा और शक्ति हो,
हनुमत के जैसी…
निष्ठा और शक्ति हो।।
मेरी जीवन नैया हो,
प्रभु राम खिवैया हो,
राम कृपा की सदा मेरे…
सिर पर छैया हो,
राम कृपा की सदा मेरे…
सिर पर छैया हो।।
सरयू का किनारा हो,
निर्मल जलधारा हो,
दर्श मुझे भगवन…
जिस घड़ी तुम्हारा हो,
दर्श मुझे भगवन…
जिस घड़ी तुम्हारा हो।।
लक्ष्मण सा भाई हो,
कौशल्या माई हो…
स्वामी तुम जैसा,
मेरा रघुराई हो…
स्वामी तुम जैसा,
मेरा रघुराई हो।।

मैं आचार्य ब्रह्मदत्त, सनातन धर्म का एक साधक और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचारक हूँ। मेरा जीवन देवी-देवताओं की आराधना, वेदों-पुराणों के अध्ययन और भक्ति मार्ग के अनुसरण में समर्पित है। सूर्य देव, खाटू श्याम, शिव जी और अन्य देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान करना मेरे लिए केवल एक लेखन कार्य नहीं, बल्कि एक दिव्य सेवा है। मैं अपने लेखों के माध्यम से भक्तों को पूजन विधि, मंत्र, स्तोत्र, आरती और धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान सरल भाषा में प्रदान करने का प्रयास करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने आध्यात्मिक पथ को सुगम और सार्थक बना सके। View Profile