कहो जी कैसे तारोगे मेरे राम मेरा अवगुण भरा शरीर लिरिक्स

भक्ति का मार्ग सरल नहीं होता, और जब मन बार-बार अपने दोषों पर दृष्टि डालता है, तब एक ही प्रश्न आत्मा से उठता है कहो जी कैसे तारोगे मेरे राम, मेरा अवगुण भरा शरीर?। यह भजन आत्मस्वीकृति और प्रभु कृपा की प्रार्थना का सजीव चित्र है। मैं, रोहन पंडित, इस भजन के माध्यम से आपको उस भावभूमि पर आमंत्रित करता हूँ जहाँ भक्त अपने समर्पण से प्रभु श्रीराम से क्षमा और उद्धार की याचना करता है।

Kaho Ji Kaise Taroge Mere Ram Mera Avagun Bhara Sharir

कहो जी कैसे तारोगे मेरे राम,
मेरा अवगुण भरा शरीर
अवगुन भरा शरीर मेरा,
अवगुण भरा शरीर
कहों जी कैसे तारोगे मेरे राम,
मेरा अवगुण भरा शरीर।।

अंका तारे बंका तारे,
तारे सज्जन, कसाई
सुआ पढ़ावत गणिका तारी,
तारी मीरा बाई
कहों जी कैसे तारोगे मेरे राम,
मेरा अवगुण भरा शरीर।।

ध्रुव तारे प्रहलाद उबारे,
और गजराज उबारे
नरसी जी को भात भरायो,
रूप साँवरो धारे
कहों जी कैसे तारोगे मेरे राम,
मेरा अवगुण भरा शरीर।।

धन्ना भगत को खेत भरायो,
नानक चान चबाई
सेन भगत का सासा मेट्या,
आप बने हरि नाई
कहों जी कैसे तारोगे मेरे राम,
मेरा अवगुण भरा शरीर।।

काशी के हम वासी कहिये,
नाम है मेरा कबीरा
करनी करके पार उतर जा,
जात परन कुल हीरा
कहों जी कैसे तारोगे मेरे राम,
मेरा अवगुण भरा शरीर।।

कहो जी कैसे तारोगे मेरे राम,
मेरा अवगुण भरा शरीर
अवगुन भरा शरीर मेरा,
अवगुण भरा शरीर
कहों जी कैसे तारोगे मेरे राम,
मेरा अवगुण भरा शरीर।।

कहो जी कैसे तारोगे मेरे राम, मेरा अवगुण भरा शरीर एक ऐसा भजन है जो यह स्मरण दिलाता है कि प्रभु राम करुणा के सागर हैं। जब भी हम स्वयं को दोषों से घिरा पाते हैं, तब राम नाम ही एकमात्र सहारा बनता है। उनके चरणों में समर्पण ही मोक्ष का मार्ग है। ऐसे ही गूढ़ भाव लिए हुए भजनों को पढ़ने के लिए प्रभु मैंने तुम्हे पार किया तुम मोहे पार करो, धुला लो पाँव राघव जी अगर जो पार जाना है, राम से बड़ा राम का नाम जो सुमिरे भव पार हो जाए और कब सुधि लोगे मेरे राम अवश्य करें। यही भक्ति है, यही मुक्ति है। जय श्रीराम!

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