ईश्वर तेरे दरबार की महिमा अपार है भजन लिरिक्स

ईश्वर तेरे दरबार की महिमा अपार है यह भजन भगवान के दरबार और उनकी असीम महिमा को दर्शाता है। भक्ति में जब दिल से भगवान को याद किया जाता है, तो हर एक प्रार्थना उनके दरबार में एक पूजा बन जाती है। इस भजन में भक्त अपने हृदय के गहरे प्रेम और श्रद्धा से भगवान के दिव्य दरबार की महिमा का गुणगान करता है। यह भजन हमें यह याद दिलाता है कि ईश्वर के दरबार में कभी कोई कमी नहीं होती, उनका प्रेम और आशीर्वाद अनंत है। भगवान के दरबार में आने से जीवन में हर मुश्किल का हल मिलता है, और एक दिव्य शांति की प्राप्ति होती है।

Ishwar Tere Darbar Ki Mahima Apar hai

ईश्वर तेरे दरबार की,
महिमा अपार है
बंदा न सके जान,
तेरा क्या बिचार है
ईंश्वर तेरे दरबार की,
महिमा अपार है।।

पृथ्वी ये जल के बीच,
किस आसरे खड़ी
सूरज और चाँद घूमते,
किसके आधार है
ईंश्वर तेरे दरबार की,
महिमा अपार है।।

सागर न तीर लाँघते,
सूरज दहे नहीं
चलती हवा मर्यादा से,
किसके करार है
ईंश्वर तेरे दरबार की,
महिमा अपार है।।

भूमि बिछा है बिस्तरा,
नदियों में जल भरा
चलती हवा दिन-रात,
जीवन का आधार है
ईंश्वर तेरे दरबार की,
महिमा अपार है।।

फल फूल अन्न शाक,
कंद मूल रस भरे
घृत दूध दही खान पान,
की बहार है
ईंश्वर तेरे दरबार की,
महिमा अपार है।।

पिता है तू दयालु,
तेरे बाल हम सभी
‘ब्रह्मानन्द’ तुझे धन्यवाद,
बार बार है
ईंश्वर तेरे दरबार की,
महिमा अपार है।।

ईश्वर तेरे दरबार की,
महिमा अपार है
बंदा न सके जान,
तेरा क्या बिचार है
ईंश्वर तेरे दरबार की,
महिमा अपार है।।

ईश्वर तेरे दरबार की महिमा अपार है भजन में हम भगवान की महिमा और उनके दरबार के आशीर्वाद को महसूस कर सकते हैं। इसी प्रकार के भजन जैसे राम तेरे नाम से पानी में पत्थर तेर रहे और केवट राम का भक्त है दोनों चरणों को धोना पड़ेगा में भी हम भगवान की कृपा और उनके नाम की शक्ति का अनुभव करते हैं। प्रभु के दरबार में जो श्रद्धा और प्रेम से भरा होता है, वह जीवन में हर कष्ट को दूर कर देता है। जय श्रीराम!

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