चल चल चंचल चित्रकूट मन राजे जहाँ श्री राम

चल चल चंचल चित्रकूट मन राजे जहाँ श्री राम भजन भगवान राम के चित्रकूट में निवास करने और वहां उनके साथ बिताए गए दिव्य समय की सुंदरता को दर्शाता है। यह भजन चित्रकूट की पवित्र भूमि और उस स्थान की शांतिपूर्ण व आध्यात्मिक महिमा का गुणगान करता है, जहाँ श्री राम ने अपने वनवास के दौरान अपने भाई लक्ष्मण और सीता के साथ कुछ समय बिताया था। इस भजन के माध्यम से, भक्ति और श्रद्धा का भाव व्यक्त होता है, जो राम के प्रति प्रेम और उनकी भूमि के प्रति श्रद्धा को प्रकट करता है।

Chal Chal Chanchal Chitrakut Man Raje Jaha Shri Ram

दोहा –
चित्रकूट में हो रही,
राम नाम की लूट
निर्मल मन होवे जात है,
हो भव बंधन से छूट।।

चल चल चंचल चित्रकूट मन,
राजे जहाँ श्री राम
मन भावन छवि धाम,
पावन पय मंदाकिनि गँगा
बहती जहाँ अविराम,
मन भावन छवि धाम।।

मनहर घाट बने अति सुन्दर,
गिरिवर राजे चंहु दिशि मंदिर
स्वर्ग छटा छवि उतरी भू पर,
दिशि दक्षिण में लखन पहाड़ी
जहाँ लक्षमन बलधाम,
मन भावन छवि धाम।।

पीली कोठी बनी है न्यारी,
जाकी कला कृति कितनी प्यारी
मुनि की प्रतिमा है मनहारी,
शीशे युक्त रचे जंहा खम्भे
बीच में विरचित आम,
मन भावन छवि धाम।।

मुख अरविंद द्वार छवि राजे,
राम भक्त अरु बंदर राजे
ऋषिमुनि पग पग जँह पे विराजे,
रज रज जाकी पावन कीन्ही
आके लखन सियाराम,
मनभावन छवि धाम।।

कामदगिरि का जो करे दर्शन,
मिट जाए ताप हो खुश अंतर्मन
पूरण काम है रज स्पर्शन,
निर्मल मन को शांति मिले जहाँ
जपे जो प्रभु का नाम,
मन भावन छवि धाम।।

चल चल चंचल चित्रकुट मन,
राजे जहाँ श्री राम
मन भावन छवि धाम,
पावन पय मंदाकिनि गँगा
बहती जहाँ अविराम,
मन भावन छवि धाम।।

चल चल चंचल चित्रकूट मन राजे जहाँ श्री राम भजन हमें श्री राम के जीवन के एक महत्वपूर्ण अध्याय को याद दिलाता है, जहाँ चित्रकूट की भूमि ने उन्हें शांति और आत्मनिर्भरता का अनुभव कराया। भगवान राम की भक्ति में डूबे हुए अन्य भजनों जैसे राम का नाम लीजिये और संग चले राम के से भी हमें यह एहसास होता है कि राम की उपस्थिति और उनकी साधना में हमारे जीवन को सत्य और शांति की दिशा मिलती है। इस भजन को पढ़कर हम अपने मन को श्री राम के चरणों में समर्पित कर सकते हैं और उनके आदर्शों को अपने जीवन में लागू कर सकते हैं।

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