मोतियों की है ये माला, मेरे काम की नहीं है भजन एक गहरी सोच और भक्ति का प्रतीक है। इस भजन में यह संदेश है कि बाहरी वस्तुएं, जैसे सोने-चांदी या मोतियों की माला, असल में हमारे आत्मिक जीवन के लिए कोई महत्व नहीं रखतीं। असली माला वह है जो भगवान के नाम से जुड़ी हो, और जिसकी हर कड़ी भक्ति और सच्चाई से बनी हो।
Motiyo Ki Hai Ye Mala Mere Kaam Ki Nahi Hai
मोतियों की है ये माला,
मेरे काम की नहीं है।
इस में कही भी सूरत,
मेरे राम की नहीं है।
मोतियो की है ये माला,
मेरे काम की नहीं है।।
हीरे मोती से मुझे भला क्या काम है,
मेरे मन के मंदिर में मेरे राम है।
मैं हूँ राम का दीवाना,
जाने ये सब जमाना।
करने को सेवा प्रभु की,
सांसे मुझे मिली है।
मोतियो की है ये माला,
मेरे काम की नहीं है।।
मेरे हर श्वास पर प्रभु राम का नाम है,
प्रभु राम के चरणों में मेरा धाम है।
जा कर बजा दूँ डंका,
पल में जला दूँ लंका।
सिया राम बसते मन में,
ह्रदय छवि बसी है।
मोतियो की है ये माला,
मेरे काम की नहीं है।।
सच्ची भक्ति का मतलब,
हनुमान ने समझा दिया।
सीना चीर के सियाराम का,
दर्श करा दिया।
फिर मुख ना कोई खोले,
श्री राम उठ के बोले।
भक्त शिरोमणि है हनुमत,
श्री राम ने कही है।
मोतियो की है ये माला,
मेरे काम की नहीं है।।
मोतियों की है ये माला,
मेरे काम की नहीं है।
इस में कही भी सूरत,
मेरे राम की नहीं है।
मोतियो की है ये माला,
मेरे काम की नहीं है।।
यह भजन हमें यह सिखाता है कि हम जितना भी भौतिक संपत्ति या ऐश्वर्य इकट्ठा करें, असली शांति और सुख केवल भक्ति और ईश्वर के नाम में ही है। मोतियों की माला या धन दौलत हमें संतुष्टि नहीं दे सकते, लेकिन प्रभु की भक्ति हमें सच्ची खुशी और आंतरिक शांति प्रदान करती है। हमारे जीवन में परमात्मा का नाम और उनका स्मरण ही सबसे कीमती वस्तु होनी चाहिए, और यह भजन उसी आंतरिक शांति और दिव्यता की ओर हमारे दिल को प्रेरित करता है।