लहरों में क्यों फसाई रे कन्हैया मेरी नैया
Laharo Mien Kyo Fasai Re Kanhaiya Meri Naiya दोहा-जिंदगी के झमेले,कभी कम नहीं होते,लेगा कब सुध सांवरे,जब हम नहीं होंगे,तेरा किया तू जाने कन्हैया,मैं तो पड़ा तेरी चरणों में। लहरों में क्यों फसाई रे,कन्हैया मेरी नैया,नैया मेरी कन्हैया मेरी,नैया मेरी कन्हैया मेरी,लहरो में क्यों फसाई रे।। थाम के उंगली तेरी कन्हैया,जीवन मैंने गुजार दिया,अच्छा भला … Read more