जब कोई सच्चे भाव से श्याम के चरणों में समर्पित हो जाता है, तो उसे न तो सुख की इच्छा रहती है और न ही दुख का भय। खुशियां दे या गम दे मुझको ये तेरा अधिकार है भजन इसी अटूट भक्ति और समर्पण का प्रतीक है। जब मनुष्य को यह विश्वास हो जाता है कि जीवन की हर परिस्थिति केवल श्याम की इच्छा से ही चलती है, तब वह हर हाल में उन्हें धन्यवाद देता है और उनके नाम का जाप करता है।
Khushiyan De Ya Gam De Mujhko Ye Tera Adhikar Hai
खुशियां दे या गम दे मुझको,
ये तेरा अधिकार है,
चाहे जैसे रखना मुझको,
बाबा मुझे स्वीकार है,
चाहे जैसे रखना मुझको,
बाबा मुझे स्वीकार है।।
सौंप दिए मैंने जीवन नैया,
बाबा तुम्हारे हाथों में,
दे देना नैया को किनारा,
ना बहला ना तू बातों में,
एक सहारा मुझको है तेरा,
लाखों तेरे उपकार है,
चाहे जैसे रखना मुझको,
बाबा मुझे स्वीकार है।।
ना जाने कितनों की बाबा,
तुमने बिगड़ी बनाई है,
उजड़ी हुई बगिया को तुमने,
हाथों से सजाई है,
दूर ना करना चरणों से तू,
भक्तों की यह पुकार है,
चाहे जैसे रखना मुझको,
बाबा मुझे स्वीकार है।।
जीवन की बस एक ही आशा,
तेरा मेरा साथ रहे,
जब तक सांस रहे मेरी बाबा,
सर पे तेरा हाथ रहे,
‘संजय’ की है दौड़ तुम्ही तक,
तू ही मेरा आधार है,
चाहे जैसे रखना मुझको,
बाबा मुझे स्वीकार है।।
खुशियां दे या गम दे मुझको,
ये तेरा अधिकार है,
चाहे जैसे रखना मुझको,
बाबा मुझे स्वीकार है,
चाहे जैसे रखना मुझको,
बाबा मुझे स्वीकार है।।
श्याम भक्त का प्रेम न स्वार्थ से बंधा होता है, न ही किसी इच्छा से। वह तो बस अपने श्याम को हर हाल में स्वीकार करता है। यही भाव हमें “सांवरे हारे का सहारा तेरा नाम है”, “बाबा पे विश्वास होना चाहिए”, “विश्वास है तो सहारा मिलेगा”, और “करले भरोसा श्याम पे प्यारे तेरा साथ निभाएगा” जैसे भजनों में भी देखने को मिलता है। जब मन में यह भाव आ जाता है, तो जीवन में हर स्थिति में श्याम की कृपा ही दिखाई देती है। आइए, इस भजन को पढ़ें और श्याम की भक्ति में मग्न हो जाएं। जय श्री श्याम!