मुझे मस्ती चढ़ गई रे भजन श्याम बाबा की भक्ति में डूबे भक्त की अलौकिक आनंद अवस्था को दर्शाता है। जब कोई श्याम प्रेमी उनके रंग में रंग जाता है, तो दुनिया की हर चिंता भूलकर केवल भक्ति की मस्ती में खो जाता है। यह भजन भक्तों के भीतर उमंग, उल्लास और भक्ति का नया जोश भर देता है। बाबा की कृपा जिस पर भी होती है, वह जीवन की हर कठिनाई को सहजता से पार कर लेता है।
Mujhe Masti Chadh Gai Re
झुमका गिरा रे
मुझे, मस्ती चढ़ गई रे, सांवरिया, तेरे नाम की ॥
मुझे, मस्ती चढ़ गई रे ॥ सांवरिया, तेरे नाम की…
मुझे, मस्ती चढ गई रे…
हमने, तेरे, रंग में बाबा, खुद को, रंग लिया है ।
दुनियाँ, से बेगाने होकर, तेरा संग लिया है ॥
तूँ, हमको है, सबसे प्यारा, अब ये, जान लिया है ।
अपने, जीवन का मालिक बस,
तुझको, मान लिया बाबा, तुझको मान लिया,
अब, परवाह ना कोई, हमको, अपने अंजाम की…
मुझे, मस्ती चढ गई रे…
बार बार, तुझसे मिलने के, करते रहे बहाने ।
एक, झलक को, तरसते रहते, बाबा तेरे दीवाने ॥
तुमसा ना, दातार है कोई, सारी, दुनिया जाने ।
हम तेरे, पागल बाबा,
तूँ, माने या ना माने, तूँ माने या ना माने,
मुझे, खींच, ले आती है, ये माटी, तेरे धाम की.,,
मुझे, मस्ती चढ़ गई रे…
पंकज, जैसे, कितनो की तूँ, बाबा, मौज़ करावे ।
थोड़ा, मांगे, ज्यादा दे तूँ, खाली ना लौटावे ॥
तेरी, महिमा, भारी बाबा, हमसे, कही ना जाए ।
तूँ उस पर, लुट जाए बाबा,
जो तुझ पर, लुट जाए बाबा, जो तुझ पर लुट जाए,
तेरी, चौखट रह गई है. बस बाबा म्हारे काम की…
मुझे, मस्ती चढ़ गई रे…
लो, आ गया, खाटू वाला, लो, आ गया, नीले वाला ॥
लो, आ गया, खाटू वाला, लो, आ गया, नीले वाला ॥
वो, भक्तों का रखवाला, लो, आ गया, खाटू वाला ॥
श्याम बाबा की भक्ति में जो डूब जाता है, उसके जीवन में सच्चा आनंद आ जाता है। “मुझे मस्ती चढ़ गई रे” भजन इसी भक्तिपूर्ण आनंद को दर्शाता है। श्याम प्रेम और उनकी कृपा का अनुभव करने के लिए सुन लो श्याम पुकार हमारी, सांवलिया सरकार तुम्हारी लीला न्यारी है, जब से हम श्याम तेरे सहारे हुए, और दरबार अधूरा बाबा का हनुमान के बिना, फागन अधूरा सूरजगढ़ निशान के बिना भजन भी पढ़ें और श्याम जी की भक्ति में मग्न हो जाएं।