मैं पतंग हूं बाबा

भक्तों, जब हम खुद को श्याम बाबा के चरणों में समर्पित कर देते हैं, तो हमारी डोर उन्हीं के हाथ में आ जाती है। हम इस संसार रूपी आकाश में उड़ने वाली पतंग की तरह हैं, और बाबा श्याम ही हमें सही दिशा में उड़ान देते हैं। आज हम जिस भजन मैं पतंग हूँ बाबा की चर्चा कर रहे हैं, वह इसी भक्ति और समर्पण को दर्शाता है। आइए, इस भजन को गाकर श्याम प्रेम में डूब जाएं।

Mai Patang Hu Baba

मैं पतंग हु प्यारे तेरे हाथ है मेरी डोर,
मैं हु तेरी मर्जी पे नचाले जिस और,
एक चले न बाबा तेरे आगे मेरा जोर,
मैं हु तेरी मर्जी पे नचाले जिस और,

तू श्याम बाबा मेरा तू ही मेरी मैया,
थाम के कलाही चलना धुप हो जा छइया,
देख के तुझको सोऊ तेरे भजन से जागे बोर
मैं हु तेरी मर्जी पे नचाले जिस और……..

जीत भी काबुल मुझे हार भी काबुल है,
प्यार तेरे फूलो से भी हार भी काबुल है,
जीत के ना इतराऊ हारू तो करू ना छोर,
मैं हु तेरी मर्जी पे नचाले जिस और….

करू मैं गुलामी तेरी यही मेरा खवाब है,
अजमा के देख ये गुलाम ला जवाब है,
तू जो कहे मैं तो नाचो तेरे आगे बनके मोर,
तेरी ख़ुशी की खातिर बन जाऊ माखन चोर,

श्याम बाबा की डोर जिसे थाम ले, उसकी उड़ान कभी रुकती नहीं, बल्कि वह उनकी कृपा से ऊँचाइयों को छूता जाता है। यह भजन हमें उनके प्रति पूर्ण समर्पण और विश्वास की सीख देता है। ऐसे ही अन्य भजनों जैसे “भरोसे हम तो बाबा के, जो होगा देखा जाएगा , तेरे भरोसे खाटू वाले रहता है मेरा परिवार , बड़ी दूर से चलकर आया हूँ“, और “श्याम धणी से प्रीत लगा ली” को भी अवश्य करें और श्याम भक्ति में खो जाएं।

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