खाटू की रज को समझो ना बालू

खाटू की रज को समझो ना बालू भजन खाटू धाम की महिमा को दर्शाता है, जहाँ की रज भी भक्तों के लिए चमत्कारी और पावन मानी जाती है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि खाटू की मिट्टी कोई साधारण धूल नहीं, बल्कि स्वयं श्याम बाबा की कृपा से ओतप्रोत है। जो भी श्रद्धालु इस धाम में आकर इसके कण-कण को अपने माथे से लगाता है, वह सुख, शांति और मोक्ष का मार्ग प्राप्त करता है।

Khatu Ki Raj Ko Samjho Na Baalu

खाटू की रज को बावरे,समझो ना बालू रेत 2
जाने कितने प्रेमियो ने 2 खुद की चढ़ाई भेट
खाटू…

जो भी लगाये माथे से,कटते उसके कलेश
कन कन मे खाटू रज के, बस्ते खाटू नरेश ] 2
जपने से श्याम नाम के,दर्शन से मात्र श्याम के
बन गये है कितने सेठ
खाटू…

खाटू की रज से प्रेमियो,जुडा हुआ इतिहास
कितने ही भक्तौ ने यहाँ,अन्तिम ली है साँस ] 2
आरती जैसे भगतो ने,ना जाने कितने भक्तौ ने
चढाया खुद को है भेट
खाटू…

जब जब भी जाओ खाटू,थोडा करना ध्यान
चले गये जो श्याम शरण,करना उन्हे प्रणाम ] 2
माथे पे रज लगाने मे,महिमा को संजय गाने मे
होना नही कभी तू लेट
खाटू…

खाटू धाम केवल एक स्थान नहीं, बल्कि भक्तों के लिए स्वर्ग से बढ़कर है, जहाँ बाबा श्याम की कृपा हर कण में समाई हुई है। “खाटू की रज को समझो ना बालू” भजन भी इसी श्रद्धा और भक्ति को प्रकट करता है। श्याम प्रेम और उनकी कृपा का अनुभव करने के लिए बिखर गया हूँ बाबा, श्याम-श्याम रट मन बावरा, थे म्हारा सरकार, म्हारा खाटू वाला श्याम, और आते हैं बाबा श्याम को जादू कमाल के भजन भी पढ़ें और श्याम जी की भक्ति में रम जाएं।

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