गले से लगा लो ना साँवरिया

गले से लगा लो ना साँवरिया भजन भक्त के प्रेम, समर्पण और करुण पुकार को दर्शाता है। जब जीवन के संघर्ष भारी पड़ने लगते हैं, जब मन व्याकुल होता है, तब श्याम बाबा ही एकमात्र सहारा होते हैं। यह भजन एक भक्त की भावना को प्रकट करता है, जो अपने प्रिय श्याम से बस इतना चाहता है कि बाबा उसे अपनाकर अपने गले से लगा लें। बाबा की भक्ति में खो जाने का यह भाव, हमें उनसे और भी गहरा जुड़ने की प्रेरणा देता है।

Gale Se Laga Lo Na Sanwariya

गले से लगा लो ना साँवरिया,
गले से लगा लो ना,
तुम्हारे सिवा कोई ना मेरा,
मुझे अपना बना लो ना ।।

अपना नही कोई सगले पराये,
जितना उठु मुझे उतना गिराये,
आकर सँभालो ना साँवरिया,
आकर सँभालो ना,
तुम्हारे सिवा कोई ना मेरा,
मुझे अपना बना लो ना….

तेरे बिना ना कोई हमारा,
हमने सुना तू है हारे का सहारा,
मुझे भी जीता दो ना साँवरिया,
मुझे भी जीता दो ना,
तुम्हारे सिवा कोई ना मेरा,
मुझे अपना बना लो ना….

‘गंगा गौरी’ तुझको पुकारे,
आजा रे आजा पागल के प्यारे,
प्रेम बढ़ा लो ना साँवरिया,
प्रेम बढ़ा लो ना,
तुम्हारे सिवा कोई ना मेरा,
मुझे अपना बना लो ना….

गले से लगा लो ना साँवरिया,
गले से लगा लो ना,
तुम्हारे सिवा कोई ना मेरा,
मुझे अपना बना लो ना ।।

श्याम बाबा के प्रेम में जो डूब जाता है, उसे सारा संसार तुच्छ लगने लगता है। “गले से लगा लो ना साँवरिया” भजन इसी भक्तिपूर्ण प्रेम को दर्शाता है। श्याम प्रेम और उनकी कृपा का अनुभव करने के लिए मेरे श्याम धनी तुझे लाखों प्रणाम, तेरे द्वार से बाबा, दरबार से कभी भी कोई भी खाली ना गया, पान को प्रसाद बाबा करो स्वीकार जी, भोग लगाओ, और मुझे मस्ती चढ़ गई रे भजन भी पढ़ें और श्याम जी की भक्ति में मग्न हो जाएं।

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