दिल का सुनाऊँ किसे हाल मेरे साँवरे

भक्तों, जब जीवन में कठिनाइयाँ बढ़ जाती हैं और मन व्याकुल हो उठता है, तब केवल एक ही सहारा बचता है—हमारे सांवरे श्याम। हर भक्त का दिल अपने प्रिय श्याम से अपने मन की बातें कहने को बेचैन रहता है, क्योंकि बाबा ही वह हैं जो बिना कहे भी हमारे हर भाव को समझ लेते हैं। आज हम जिस भजन दिल का सुनाऊँ किसे हाल मेरे साँवरे की चर्चा कर रहे हैं, वह भक्त के उसी भाव को व्यक्त करता है, जहाँ वह अपने दुःख-सुख, अपनी व्यथा केवल श्याम बाबा के चरणों में रखता है।

Dil Ka Sunaun Kise Haal Mere Sanware

दिल का सुनाऊ किसे हाल मेरे सांवरे
सुनता ना कोई भी पुकार मेरे सांवरे
दिल का सुनाऊ किसे…

दर दर मैं भटकी ठोकरें भी खाई
दुनियाँ में मेरा कोई हुआ ना सहाई
दुनियाँ से गई मैं तो हार मेरे सांवरे
दिल का सुनाऊ किसे…

जब से सुना मैंने इक द्वार ऐसा
हार के गया है जो भी हारा ना दोबारा
हार के मैं आयी तेरे द्वार मेरे सांवरे
दिल का सुनाऊ किसे…

खुशी को भी दी तूने खुशियाँ हजार है
कहलाया जग में तू लखदातार है लखदातार है
अमित भी करे ये पुकार मेरे सांवरे
दिल का सुनाऊ किसे…

श्याम बाबा अपने हर भक्त के हृदय की पुकार सुनते हैं और उसे कभी अकेला नहीं छोड़ते। यह भजन हमें उनके असीम प्रेम और कृपा का एहसास कराता है। ऐसे ही अन्य भजनों जैसे “भरोसे हम तो बाबा के, जो होगा देखा जाएगा”, “बड़ी दूर से चलकर आया हूँ”, “तेरे भरोसे खाटू वाले रहता है मेरा परिवार”, और “बैठे बैठे खाटू में ओ सांवरे” को भी अवश्य करें और श्याम प्रेम में डूब जाएं।

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