बोल सांवरिया बोल तुझको कैसे रिझाया जाए

बोल सांवरिया बोल तुझको कैसे रिझाया जाए भजन भक्त के मन में उठने वाले उस मधुर प्रश्न को दर्शाता है, जिसमें वह श्याम बाबा को प्रसन्न करने का मार्ग तलाशता है। यह भजन प्रेम और समर्पण की भावना को प्रकट करता है, जहाँ भक्त बाबा से यह पूछता है कि उन्हें कौन-से कार्य प्रिय हैं, जिससे उनकी कृपा प्राप्त हो सके। आइए, इस भजन को पढ़कर श्याम जी को रिझाने की इस भक्तिपूर्ण भावना में डूब जाएं।

Bol Sanwariya Bol Tujhako Kaise Rijhaya Jaye

कैसे रिझाया जाए
कैसे रिझाया जाए
बोल सांवरिया बोल तुझको कैसे रिझाया जाए – 2

आप बोलो वो भजन सुना दु
गर बोलेंगे तो नाच कर दिखा दु
बोलो बोलो सांवरिया मुख को खोलो सांवरिया – 2
वो ही कराया जाए
शीश झुकाया जाए या आंसू चढ़ाए जाए
बोल सांवरिया बोल तुझको कैसे रिझाया जाए – 2

खीर चूरमे का भोग बनवा दू
अपने हाथों से तुमको जीमा दु
बोलो बोलो सांवरिया मुख को खोलो सांवरिया वो ही बनवाया जाए
खीचड़ बनवाया जाए या छप्पन भोग लगवाए
बोल सांवरिया बोल तुझको कैसे रिझाया जाए

गिरधारी ने कह दिया जो कहना है
खाटू वाले के संग में ही रहना है
हो सुबह चाहे शाम मैं रटू तेरा नाम
मेरे श्याम प्यारे
जयकार लगाई जाए या ताली बजवाई जाए
बोल सांवरिया बोल तुझको कैसे रिझाया जाए

श्याम बाबा प्रेम और भक्ति से शीघ्र प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों को अनंत कृपा प्रदान करते हैं। “बोल सांवरिया बोल तुझको कैसे रिझाया जाए” भजन भी इसी प्रेम और समर्पण को प्रकट करता है। श्याम प्रेम और उनकी कृपा का अनुभव करने के लिए मेरे सांवरे का नाम जपे जायेगा, सुख पायेगा, बाबा मेरी किस्मत बुलंद कर दे, हर ग्यारस पे मिलने का प्रबंध कर दे, सांवलिया सेठ के श्री चरणों में अर्जी लगाने आया हूं, और [गले से लगा लो ना साँवरिया

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