अलूसिंह जी महाराज को नमन बार-बार भजन वीरता, भक्ति और शौर्य के प्रतीक अलूसिंह जी महाराज को समर्पित है। श्याम बाबा के अनन्य भक्त अलूसिंह जी का जीवन त्याग और समर्पण का अद्भुत उदाहरण है। यह भजन हमें उनकी भक्ति, पराक्रम और निस्वार्थ सेवा की याद दिलाता है, जिससे हर श्याम भक्त प्रेरणा ले सकता है। जब हम इस भजन को पढ़ते हैं, तो हमें अलूसिंह जी महाराज की अपार भक्ति और उनकी अद्भुत लीलाओं का स्मरण होता है।
Alusingh Ji Maharaj Ko Naman Bar Bar
आलू सिंह जी महाराज को नमन बार बार
उनकी सेवा और भग्ति को नमन बार बार
1.. श्याम बहादुरजी को वो, मानते थे गुरु
उन गुरुवों को दिल से.. नमन बार बार
2.. चुनकर लाते थे वो, श्याम बगीची से फुल
उस बगीची और फुलों को.. नमन बार बार
3.. घर घर जाते थे वो, ज्योत जगाते थे वो
उनके भावभरे भजनों को.. नमन बार बार
4.. भग्तों को तीन थापी, लगाते थे वो
उस मोरछड़ी के झाड़े को.. नमन बार बार
5.. भग्तों के काम करवाते, थे भाव से
उनकी किरपा और अखाड़ों को.. नमन बार बार
6.. उनके हाथों से ही, सजता था सांवरा
उस चंदन के लेप को.. नमन बार बार
7.. दो अक्टूबर के दिन, वो हो गए श्यामलीन
उनकी पुण्यतिथि को.. नमन बार बार
8.. कहते थे वो हर बार, ये है साँचा दरबार
भग्तों के संग अम्बरीष का.. नमन बार बार
अलूसिंह जी महाराज की भक्ति और शौर्य अद्वितीय है, और उनकी निस्वार्थ सेवा हमें श्याम बाबा के प्रति अटूट समर्पण की प्रेरणा देती है। “अलूसिंह जी महाराज को नमन बार-बार” भजन हमें इसी भक्ति भावना में रंग देता है। श्याम प्रेम और उनकी कृपा का अनुभव करने के लिए आया जनमदिन म्हारे श्याम का, तू बाबा मुझे थाम ले, तेरी ज्योत जगाई है हमने, और बाबा मैं हूँ दास तेरा भजन भी पढ़ें और श्याम जी की भक्ति में डूबें। ????????