जीणमाता, जिन्हें देवी दुर्गा का अवतार माना जाता है, की कृपा प्राप्त करने के लिए जीण चालीसा का पाठ सबसे उत्तम माना जाता हैं। Jeen Chalisa का नियमित पाठ करने से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का संचार होता है। अगर आप माँ जीणमाता की कृपा पाना चाहते हैं, तो हमने नीचे इस पवित्र ग्रंथ का पाठ आपके लिए उपलब्ध कराया है, जो आपके लिए लाभदायक होगा-
Jeen Chalisa
दोहा
श्री गुरु पद सुमरण करी,गोंरी नंदन ध्याय,
वरनों माता जीण यश , चरणों शीश नवाय।
झांकी की अद्भुत छवि , शोभा कही न जय,
जो नित सुमरे माय को , कष्ट दूर हो जाय।
चोपाई
जय जय जय श्री जीण भवानी॥
दुष्ट दलन सनतन मन मानी॥१ ॥
कैसी अनुपम छवि महतारी॥
लख निशिदिन जाऊ बलहारी॥२ ॥
राजपूत घर जनम तुम्हारा ॥
जीण नाम माँ का अति प्यारा॥३ ॥
हर्षा नाम मातु का भाई॥
प्यार बहन से है अधिकाई॥४ ॥
मनसा पाप भाभी को आया॥
बहन से ये नहीं छुपे छुपाया॥५ ॥
तज के घर चल दीन्ही फ़ौरन॥
निज भाभी से करके अनबन॥६ ॥
नियत नार की हर्षा लख कर॥
रोकन चला बहन को बढ़ कर॥७ ॥
रुक जा रुक जा बहन हमारी॥
घर चल सुन ले अरज हमारी॥८ ॥
अब भेया में घर नहीं जाती॥
तज दी घर अरु सखा संघाती॥९ ॥
इतना कह कर चली भवानी॥
शुची सुमुखी अरु चतुर सयानी॥१० ॥
पर्वत पर चढ़कर हुँकारी॥
पर्वत खंड हुए अति भारी॥११॥
भक्तो ने माँ का वर पाया॥
वही महत एक भवन बनाया॥१२॥
रत्न जडित माँ का सिंघासन॥
करे कौन कवी जिसका वर्णन॥१३॥
मस्तक बिंदिया दम दम दमके॥
कानन कुंडल चम् चम् चमके॥१४॥
गल में मॉल सोहे मोतियन की॥
नक् में बेसर है सुवरण की॥१५॥
हिंगलाज की रहने वाली॥
कलकत्ते में तुम ही काली॥१६॥
नगर कोट की तुम ही ज्वाला॥
मात चण्डिका तुम हो बाला॥१७॥
वैष्णवी माँ मनसा तू ही॥
अन्नपुर्णा जगदम्बा तू ही॥१८॥
दुष्टो के घर घालक तुम ही॥
भक्तो की प्रतिपालक तुम ही॥१९॥
महिषासुर की मर्दन हारी॥
शुम्भ -निशुम्भ की गर्दन तारी॥२०॥
चंड मुंड की तू संहारी॥
रक्त बीज मारे महतारी॥२१॥
मुग़ल बादशाह बल नहीं जाना॥
मंदिर तोड्न को मन माना॥२२॥
पर्वत पर चढ़ कर तू आई॥
कहे पुजारी सुन मेरी माई॥२३॥
इसको माँ अभिमान है भारी॥
ये नहीं जाने शक्ति तुम्हारी॥२४॥
माँ ने भवर विलक्षण छोड़े॥
भागे हाथी भागे घोड़े॥२५॥
हार गया माँ से अभिमानी॥
गिर चरणों में कीर्ति बखानी॥२६॥
गुनाह बख्श मेरी खता बख्श दे॥
दया दिखा मेरे प्राण बख्श दे॥२७॥
तेल सवा मन तुरंत चढाया॥
दीप जला तम नाश कराया॥२८॥
माँ की शक्ति अपरम्पारा॥
वो समझे सो माँ का प्यारा॥२९॥
शुद्ध हदय से माँ का पूजन॥
करे उसे माँ देती दर्शन॥३०॥
दुःख दरिद्र को पल में टारी॥
सुख सम्पति भर दे महतारी॥३१॥
जो मनसा ले तोंकू जाये॥
खाली लोट कभी न आये॥३२॥
बाँझ दुखी और बूढ़ा बाला॥
सब पर कृपा करे माँ ज्वाला॥३३॥
पीकर सूरा रहे मतवाली॥
हर जन की करती रखवाली॥३४॥
सूरा प्रेम से करता अर्पण॥
उसको माँ करती आलिंगन॥३५॥
चेत्र अश्विन कितना प्यारा॥
पर्व पड़े माँ का अति भरा॥३६॥
दूर दूर से यात्री आवे॥
मनवांछित फल माँ से पावे॥३७॥
जात जडूला कर गठ जोड़ा॥
माँ के भवन से रिश्ता जोड़ा॥३८॥
करे कढाई भोग लगावे॥
माँ चरणों में शीश शुकावे॥३९॥
जीण भवानी सिंह वाहिनी॥
सभी समय माँ रहो दाहिनी॥४०॥
नित चालीसा जो पढ़े , दुःख दरिद्र मिट जाय।
भ्रष्ट हुए प्राणी भले , सुधर सुपथ चल आय॥
ग्राम जीण सीकर जिला, मंदिर बना विशाल।
भवरा की रानी तूँ ही ,जीण भवानी काल॥
काजल शिखर विराजती, ज्योति जलत दिन रात।
भय भंजन करती सदा ,जीण भवानी मात॥
दोहा
जय दुर्गा जय अम्बिका, जग जननी गिरिराय,
दया करो हे जगदम्बे, विनय शीश नवाय।

Jeen Chalisa का पाठ न सिर्फ भक्तों की आस्था को प्रबल करता है, बल्कि यह माता के आशीर्वाद को अनुभव करने का सशक्त माध्यम भी है। यदि आप जीणमाता के धाम की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो साथ ही जीणमाता मंदिर के दर्शन करें और वहाँ की दिव्यता का अनुभव करें। इसके अलावा, आप हर्षनाथ मंदिर, खाटू श्यामजी मंदिर, और सालासर बालाजी धाम जैसे पवित्र स्थलों की यात्रा भी कर सकते हैं, जो आपकी आध्यात्मिक यात्रा को और भी विशेष बना देंगे।
चालीसा का पाठ करने की विधि
जीणमाता की कृपा प्राप्त करने के लिए Jeen Mata Chalisa का पाठ अत्यंत प्रभावशाली होता है। सही विधि से किया गया यह पाठ जीवन में शांति, सुख और समृद्धि लाता है। आइए जानते हैं कि जीण चालीसा का पाठ करने की संपूर्ण विधि क्या है और इसे कैसे करना चाहिए।
- स्नान: चालीसा का पाठ करने से पहले तन और मन की शुद्धता आवश्यक होती है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- स्थान: पाठ के लिए घर में ही एक शांत और पवित्र स्थान का चयन करें। यदि संभव हो तो किसी मंदिर या खुले वातावरण में पाठ करना अधिक फलदायी होता है।
- स्थापना: पूजा स्थल पर माता जीणमाता की प्रतिमा या फोटो को स्थापित करें। एक चौकी पर स्वच्छ कपड़ा बिछाकर माता का आसन तैयार करें। माँ को लाल चुनरी, कुमकुम, अक्षत (चावल) और फूल अर्पित करें।
- दीपक जलाये: घी या तेल का दीपक जलाएँ और अगरबत्ती से वातावरण को सुगंधित करें। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पूजा में एकाग्रता बनी रहती है।
- संकल्प: जब सारी तैयारी पूरी हो जाए, तब माता को प्रणाम करके यह संकल्प लें कि आप पूरे श्रद्धा भाव से पाठ करेंगे और माता की कृपा प्राप्त करेंगे।
- मंत्र जप: पाठ की शुरुआत करने से पहले माँ जीणमाता का ध्यान करें और “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं जीणमाते नमः” मंत्र का 11 बार उच्चारण करें।
- माता का भोग: इसके बाद माता को पंचमेवा, मिठाई या फल का भोग अर्पित करें।
- पाठ: अब Jeen Mata Chalisa Lyrics का पाठ शुरू करें। पाठ करते समय मन को पूरी तरह माता की भक्ति में लगाएँ। प्रत्येक शब्द को स्पष्ट और श्रद्धापूर्वक उच्चारित करें। पाठ के दौरान माता के दिव्य स्वरूप और उनकी लीलाओं का चिंतन करें।
- आरती करें: जब चालीसा का पाठ पूरा हो जाए, तब माता की आरती करें। आरती के दौरान घंटी और शंख बजाने से वातावरण और अधिक पवित्र हो जाता है।
- प्रसाद वितरण: आरती के बाद माता को चढ़ाए गए प्रसाद को सभी भक्तों में बाँटें। यह माता का आशीर्वाद होता है, इसलिए इसे प्रेमपूर्वक ग्रहण करें।
- नियमितता: चालीसा का पाठ करने से मन की शांति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश होता है। यदि इस पाठ को नियमित रूप से किया जाए, तो यह जीवन के हर संकट को दूर करने में सहायक होता है।
सच्चे मन से की गई प्रार्थना और श्रद्धा से किया गया Jeen Mata Ki Chalisa कभी व्यर्थ नहीं जाता। माता जीणमाता की कृपा सदैव अपने भक्तों पर बनी रहती है।
FAQ
इस चालीसा का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
जीण माता चालीसा के पाठ से नकारात्मक शक्तियों का नाश, मानसिक शांति, संकटों से मुक्ति, धन-समृद्धि, और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
क्या इस चालीसा को किसी विशेष भाषा में पढ़ना जरूरी है?
नहीं, इसे संस्कृत, हिंदी, या किसी भी भाषा में पढ़ सकते हैं जिसमें आपको अधिक श्रद्धा महसूस हो।
क्या चालीसा के पाठ के बाद हवन करना आवश्यक है?
नहीं, हवन करना अनिवार्य नहीं है, लेकिन विशेष अवसरों पर हवन करने से लाभ अधिक होता है।
क्या चालीसा का पाठ रात में किया जा सकता है?
हाँ, लेकिन ध्यान रखें कि पाठ के बाद माता की आरती और धन्यवाद प्रार्थना जरूर करें।

मैं शिवप्रिया पंडित, माँ शक्ति का एक अनन्य भक्त और विंध्येश्वरी देवी, शैलपुत्री माता और चिंतापूर्णी माता की कृपा से प्रेरित एक आध्यात्मिक साधक हूँ। मेरा उद्देश्य माँ के भक्तों को उनके दिव्य स्वरूप, उपासना विधि और कृपा के महत्व से अवगत कराना है, ताकि वे अपनी श्रद्धा और भक्ति को और अधिक दृढ़ बना सकें। मेरे लेखों में इन देवी शक्तियों के स्तोत्र, चालीसा, आरती, मंत्र, कथा और पूजन विधियाँ शामिल होती हैं, ताकि हर भक्त माँ की आराधना सही विधि से कर सके और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को सुख-समृद्धि से भर सके। जय माता दी! View Profile