बानर बांको रे लंका नगरी में मच गयो हाको रे भजन लिरिक्स

आज हम लेकर आए हैं एक शानदार भजन बानर बांको रे लंका नगरी में मच गयो हाको रे, जो भगवान हनुमान के अद्भुत साहस और वीरता का प्रतीक है। यह भजन श्री हनुमान के लंका में सीता माता की खोज और रावण के महल में मचाए गए उत्पात को दर्शाता है। भजन में हनुमान के अदम्य बल, धैर्य और भक्ति की महिमा का वर्णन किया गया है। जब भगवान हनुमान ने लंका में राक्षसों के खिलाफ संघर्ष किया, तब उन्होंने अपनी शक्ति और साहस का परिचय दिया। इस भजन को सुनकर हमें उनके अद्वितीय कार्यों की याद आती है, जो हमें प्रेरित करते हैं।

Banar Banko Re Lanka Nagri Mien Mach Gayo Hako Re

बानर बांको रे,
लंका नगरी में…
मच गयो हाको रे,
बानर बांको रे ॥

मात सिया यूं बोली रे बेटा,
फ़ल खाई तू पाको रे,….
इतने माही कूद्या हनुमत,
मार फ़दाको रे..बानर ॥

रुख उडाख पटक धरणी पर,
भोग लगाया फ़लां को रे…
रखवाला जब पकडन लाग्या,
दियो झडाको रे..बानर ॥

राक्षसिया अडरावै सारा,
काल आ गयो म्हाको रे…
मुँह पर मार पड़े मुक्के री,
फ़ाडे बाको रे..बानर ॥

हाथ टांग तोडे,सिर फ़ोडे,
घट फ़ोडे ज्यू पाको रे…
लुक छिप कर कई घर मे घुसग्या,
पड गयो फ़ांको रे..बानर ॥

उजडी पडी अशोका वाटिका,
ज्यूं मारग सडकां को रे…
उथल पुथल सब करयो बगिचो,
बिगडयो खाको रे..बानर ॥

जाय पुकार करी रावन स्यूं,
दिन खोटो असुरां को रे…
कपि आय एक घुस्यो बाग में,
गजब लडाको रे..बानर ॥

भेज्यो अक्षय कुमार भिडन नै,
हनुमत स्यामी झांक्यो रे…
एक लात की पडी असुर पर,
पी गयो नाको रे..बानर ॥

धन धन रे रघुवर का प्यारा,
अतुलित बल है थांको रे…
तु हे जग में मुकुटमणी है,
सब भक्तां को रे..बानर ॥

रोहित राठौर (झालरापाटन राजस्थान)
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हनुमान जी के इस वीरता भरे भजन के माध्यम से हम उनके साहस और बल का आह्वान करते हैं। जैसे हनुमान जी ने लंका नगरी में उथल-पुथल मचाकर राक्षसों को हराया, वैसे ही उनके अन्य भजनों जैसे राम भज मन हनुमान और हनुमान चालीसा के माध्यम से हमें अपने जीवन में भी संकटों का सामना करने की शक्ति मिलती है। भगवान हनुमान के आशीर्वाद से हम अपने जीवन को समस्याओं से मुक्त कर सकते हैं। जय हनुमान!

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