बजरंग सा भक्त नहीं कोई अवधबिहारी का भजन लिरिक्स

बजरंग सा भक्त नहीं कोई अवधबिहारी का भजन श्री हनुमान जी की अनन्य भक्ति और उनकी अपार निष्ठा का वर्णन करता है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि हनुमान जी से बढ़कर कोई भी भक्त नहीं हुआ, जिन्होंने अपने आराध्य प्रभु श्रीराम की सेवा में अपने प्राण तक न्योछावर कर दिए। उनकी निस्वार्थ भक्ति, अपार शक्ति और अद्वितीय समर्पण उन्हें भक्तों के लिए प्रेरणास्रोत बनाता है। यह भजन हमें भी उनकी तरह भक्ति, सेवा और समर्पण का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देता है।

Bajrang Sa Bhakt Nahi Koi Avadh Bihari ka

हर युग में बजे डंका,
शिव के अवतारी का…
बजरंग सा भक्त नहीं,
कोई अवधबिहारी का।।

राम मेरे अंग अंग में,
राम मेरे रोम रोम में…
सिया की झांकी झांके,
राम के संग संग में,
सिया पिया ने मर्म लिया…
देखो ब्रम्हचारी का,
बजरंग से भक्त नही,
कोई अवधबिहारी का।।

बुध्दि बल ज्ञान के सागर,
सुयश तिहु लोक उजागर…
बलों में बिपुल बली है,
भरे गागर में सागर,
ऊंचा नाम किया जग में…
वानर बिरादरी का,
बजरंग से भक्त नही,
कोई अवधबिहारी का।।

राम पद पंकज पाए,
राम के भजन सुहाए…
अंजनी पवन केशरी,
वो शंकर सुवन कहाये,
सब देवो में पाया…
नाम सरदारी का,
बजरंग से भक्त नही,
कोई अवधबिहारी का।।

हर युग में बजे डंका,
शिव के अवतारी का…
बजरंग सा भक्त नहीं,
कोई अवधबिहारी का।।

हनुमान जी केवल शक्ति और पराक्रम के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे सबसे बड़े भक्त भी हैं, जिनकी निष्ठा और समर्पण अतुलनीय है। यह भजन हमें सिखाता है कि जब कोई प्रेम और श्रद्धा से भगवान की भक्ति करता है, तो वह स्वयं प्रभु के सबसे प्रिय बन जाते हैं, जैसे हनुमान जी श्रीराम के हुए। भक्त यदि निष्काम भाव से अपने आराध्य की सेवा करता है, तो उसे हर परिस्थिति में उनकी कृपा प्राप्त होती है और वह हर कठिनाई को सहज ही पार कर लेता है।

बजरंग सा भक्त नहीं कोई अवधबिहारी का केवल एक भजन नहीं, बल्कि सच्ची भक्ति का आदर्श उदाहरण है। यह हमें यह संदेश देता है कि यदि हम अपने जीवन में ईमानदारी, भक्ति और समर्पण को अपनाते हैं, तो हमें न केवल आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है, बल्कि हमारे समस्त भय, दुख और चिंताओं का नाश भी हो जाता है। हनुमान जी की भक्ति हमें यही सिखाती है कि प्रेम और सेवा का मार्ग ही प्रभु तक पहुँचने का सर्वोत्तम मार्ग है।

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