मुझे मैया के दरबार में ठिकाना मिल गया भजन लिरिक्स

“मुझे मैया के दरबार में ठिकाना मिल गया” भजन में भक्त अपने जीवन में मिले सुख और शांति के लिए माँ के आशीर्वाद को धन्यवाद देता है। इस भजन में भक्त यह व्यक्त करता है कि उसे माँ के दरबार में शरण मिली है, और अब वह हर परेशानी से मुक्त हो गया है। यह भजन माँ के प्रति भक्ति और आस्था का प्रतीक है, जो अपने भक्तों को जीवन के सभी संघर्षों से उबारने के लिए हमेशा उपस्थित रहती हैं।

Mujhe Maiya Ke Darbar Me Thikana Mil Gya

मुझे मैया के दरबार में,
ठिकाना मिल गया,
मुझे ठिकाना मिल गया,
कही भी लागे न जिया,
मुझे मईया के दरबार में,
ठिकाना मिल गया।।

जो भी तेरे शरण मे आये,
खाली नही वो लौट के जाए,
मैं भी आया सोच कर,
चरणों मे पड़ा हूँ,
मुझको भी तेरे दर पे,
आज आना हो गया,
मुझे ठिकाना मिल गया,
कही भी लागे न जिया,
मुझे मईया के दरबार में,
ठिकाना मिल गया।।

शक्ति तेरी क्या सब जग जानी,
दुखड़ा सुनो हे अम्बे भवानी,
भटक रहा मैं दर बदर,
मीले न ठिकाना,
तेरे दर पे मुझे आना,
एक जमाना हो गया,
मुझे ठिकाना मिल गया,
कही भी लागे न जिया,
मुझे मईया के दरबार में,
ठिकाना मिल गया।।

सुख में तुझे कोई याद न करता,
दुख आये तो तेरे शरण मे पड़ता,
ये दुख भी हो जीवन मे जो,
तेरी याद आये,
ये दुख तो जीवन का,
बस एक बहाना हो गया,
मुझे ठिकाना मिल गया,
कही भी लागे न जिया,
मुझे मईया के दरबार में,
ठिकाना मिल गया।।

मुझे मैया के दरबार में,
ठिकाना मिल गया,
मुझे ठिकाना मिल गया,
कही भी लागे न जिया,
मुझे मईया के दरबार में,
ठिकाना मिल गया।।

स्वर / रचना – रूपेश चौधरी।

माँ के दरबार में शरण प्राप्त कर हर संकट का समाधान होता है, और जीवन में सुख और शांति का आगमन होता है। यदि यह भजन आपके भीतर माँ के प्रति आस्था और विश्वास को और प्रगाढ़ करता है, तो तेरे दर से माँ इतना मिला मेरा परिवार तुमसे पला जैसे अन्य भक्तिगीत भी आपकी श्रद्धा को और मजबूत कर सकते हैं। जय माँ! ????

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